15 विधायक अशोक चौधरी के हाथ

बिहार कांग्रेस की हलचल लगातार बढ़ रही है. कांग्रेस नेतृत्व ने भले ही सोचा था कि अशोक चौधरी को हटाने से सारी समस्या खत्म हो जाएगी, पर यहां तो मामला उलझता दिख रहा है. नए प्रभारी अध्यक्ष कैकब कादरी की राह आसान नहीं दिख रही है. बताया जा रहा है कि चौधरी समर्थक 15 विधायक और 3 विधान पार्षद अभी भी पूर्व अध्यक्ष के साथ हैं.

बिहार में लगातार संघर्ष कर रही कांग्रेस अब राज्य में आपसी कलह का सामना कर रही है। राज्य में कांग्रेस के विधायकों को हाईकमान की ओर नए प्रदेश अध्यक्ष पर लिया फैसला रास नहीं आ रहा है। दरअसल, पार्टी की ओर से कैकब कादरी को राज्य का नया प्रदेश अध्यक्ष चुना गया है। अशोक चौधरी की जगह लेने वाले कादरी के सम्मान में राज्य के कांग्रेस हेडक्वॉटर में एक कार्यक्रम रखा गया था, लेकन इस मौके पर मात्र एक विधायक सिद्धार्थ ही पहुंचा. सबने कोई न कोई वज़ह बताकर अपने को कार्यक्रम से दूर रखा. वहीँ 15 विधायक और 3 विधान पार्षद अशोक चौधरी के घर पहुंचे.

इसे कांग्रेस विधायकों की नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है। यहां यह बात महत्वपूर्ण है कि चौधरी को दल-बदल विरोधी कानून से पार पाने के लिए 18 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। इधर हटाए गये अध्यक्ष अशोक चौधरी ने कहा है कि उनकी दो पीढ़ियों ने बिहार में सिर्फ कांग्रेस के लिए काम लिया, लेकिन उन्हें इस तरह अपमानित कर हटाया गया. इधर पार्टी के नेता सदानंद सिंह ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व के फैसले का वो सम्मान करते हैं।

बिहार में गठबंधन टूटने के बाद से ही आलाकमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से नाराज था। पार्टी के अंदर गुटबाजी चरम पर थी और बयानबाजी जारी थी। चौधरी पर पिछले दिनों विधायकों को बरगलाने और पार्टी तोड़ने का आरोप लगा था।

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