12 वें मंत्री पद का झुनझुना बजाते रघुवर

-संविधान सम्मत मंत्रिमंडल की बाट जोहता झारखण्ड
कुमार कौशलेन्द्र

देश में केवल दो ही संस्थाएं हैं ऐसी हैं जो संविधान के संरक्षण, परिरक्षण और प्रतिरक्षण की शपथ लेती हैं- राष्ट्रपति और राज्यपाल। यहां तक कि उप-राष्ट्रपति या सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश भी संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ लेते हैं| झारखण्ड के वर्तमान परिदृश्य में संविधान के संरक्षण, परिरक्षण और प्रतिरक्षण की शपथ के बावजूद शीर्ष पद पर विराजमान शख्सियत की बेबसी लोकतंत्र के भावी दशा और दिशा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है|

संविधान के अनुसार सदन सदस्यों की संख्या के 15 प्रतिशत तक मंत्री हो सकते हैं| झारखंड में इस हिसाब से मुख्यमंत्री समेत 12 लोग कैबिनेट में रहने चाहिए| बावजूद इसके सूबे में 12 वें मंत्री का पद अब तक प्रत्याशा का झुनझुना ही बना हुआ है| झारखंड में सत्तारूढ़ एनडीए की रघुवर सरकार के तीन साल हो चुके हैं और सरकार अगले विधानसभा की बिसात को सजाने के मोड में भी आ चुकी है किन्तु यहां अब तक मंत्रिमंडल में 11 सदस्य ही हैं और मंत्रिमंडल का एक पद रिक्त पड़ा है|

ज्ञातव्य है कि 2003 में एतद संबंधी संविधान संशोधन विधेयक आया था, जिसके अनुसार मंत्रिमंडल के न्यनूतम और अधिकतम पद तय किए गए थे| संविधान के 91वें संशोधन के अनुसार वर्ष 2004 से यह संशोधन विधेयक लागू है बावजूद इसके झारखण्ड का राजभवन इस अहम मुद्दे पर मौन है|

रघुवर सरकार में बतौर काबिना मंत्री शामिल होने के बावजूद विभिन्न मुद्दों पर अपनी ही सरकार को घेरते रहने वाले मंत्री सरयू राय को कुछ माह पूर्व संसदीय कार्यमंत्री के तौर पर बुला कर सूबे की महामहिम राज्यपाल श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने 12 वें मंत्री की नियुक्ति में हो रहे अनअपेक्षित विलम्ब पर सवाल भी किया था| तत्कालीन संसदीयकार्य मंत्री श्री राय ने इस बाबत राज्यपाल से हुई बातचीत का पूरा ब्यौरा पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास को दिया भी था| उसके बाद इस ख़बर ने सुर्खियां बटोरी की रघुवर दास जल्द ही 12 वें मंत्री को अपने मंत्रिमंडल में शामिल करने वाले हैं| मंत्री पद की प्रत्याशा में बाट जोह रहे कई माननीय शपथ ग्रहण हेतु नए शूट आदि सिलवा कर बुलावे की बाट भी जोहने लगे थे लेकिन राजभवन से किसी को बुलावा तो नहीं आया, बस आती रही मुख्यमंत्री आवास से 12 वें मंत्री पद के झुनझुने की आवाज|

मंत्री पद प्रत्याशा के झुनझुने की आवाज के बीच सरयू को साधने में बेबस रघुवर की अपने ही मंत्रिमंडल सहयोगी द्वारा विभिन्न मुद्दों पर खिंचाई के कर्कश सत्ता शोर के बीच एक अहम बदलाव भी हो गया| नीलकंठ सिंह मुंडा ग्रामीण विकास विभाग के साथ-साथ संसदीय कार्य विभाग के मंत्री बना दिए गये| राज्य सरकार ने मंत्री सरयू राय से यह दायित्व वापस ले लिया| संसदीय कार्यमंत्री होने के नाते सदन के नेता यानी मुख्यमंत्री रघुवर दास की दाईं ओर बैठने वाले सरयू राय को दूर की सीट थमा दी गयी| विधानसभा के बजट सत्र के दौरान भी सरयू राय के विरोधी रुख ने राज्य सरकार को असहज किया। सरयू राय ने विगत बजट सत्र के अंतिम दिन स्वयं को सदन की कार्यवाही से भी दूर रखा और विधानसभा अध्यक्ष से गुहार लगाई कि उन्हें विधानसभा में अलग से बैठने की सीट दी जाए। बावजूद इसके झारखण्ड के 17 वर्षों के इतिहास में सबसे लम्बे समय से मुख्यमंत्री पद की कुर्सी संभाल रहे रघुवर दास अपनी मर्जी की सरकार हांकते जा रहे हैं और मंत्रालय 12 वें मंत्री की बाट ही जोह रहा है|

मामला संवैधानिक है और इसमें महामहिम का सक्रिय हस्तक्षेप राजभवन का दायित्व है किन्तु तीन साल पूरे कर चुकी रघुवर दास नीत झारखंड की बीजेपी सरकार में एक मंत्री पद अबतक खाली है| संविधान कहता है कि झारखण्ड में 12 सदस्यों वाला मंत्रिमंडल होना चाहिए लेकिन रघुवर दास की कैबिनेट में सिर्फ 11 ही मंत्री हैं| संविधान के उल्लंघन का झारखंड में यह अकेला मामला नहीं है| संविधान कहता है कि पांचवी अनुसूची के आदिवासी बहुलता वाले झारखंड, उड़ीसा और मध्य प्रदेश में आदवासी कल्याण विभाग का होना अपरिहार्य है किन्तु झारखंड में आदिवासी कल्याण विभाग को खत्म कर के उसे समाज कल्याण, कल्याण तथा महिला एवं बाल विकास विभाग में मिला दिया गया है|

इन मुद्दों पर थम-थम कर उठने वाले शोर से संविधान की गरिमा तार-तार हो रही है किन्तु राजभवन की दीवारें मौन का लिहाफ़ ही ओढ़े हुए है| सूबे के सियासी अतीत को टटोलें तो पूर्व में राजभवन की दीवारें इतनी गूंगी नहीं रहीं हैं| मंत्रिमंडल में सिर्फ 11 मंत्री होने के मुद्दे पर 12 जून 2003 से 9 दिसम्बर 2004 तक झारखण्ड के महामहिम रहे तत्कालीन राज्यपाल वेद मारवाह ने उस समय की अर्जुन मुंडा सरकार को बर्खास्त करने की धमकी तक दे दी थी और इसके बाद मुंडा ने आनन-फानन में अपने मंत्रिमंडल के 12वें मंत्री को शपथ दिलवाई थी| दूसरी दफा अर्जुन मुंडा की ही सरकार को तत्कालीन राज्यपाल ने साल 2010 में भी 12 से कम मंत्री होने के मुद्दे पर पत्र लिख कर तय समय सीमा के अंदर मंत्रिमंडल का आकार पूरा करने को कहा था और सरकार को तब भी यह बात माननी ही पड़ी थी|

संविधान विशेषज्ञ भी इस मुद्दे पर कहते रहे हैं कि किसी भी राज्य के मंत्रिमंडल में कम से कम 12 मंत्री होने ही चाहिए| ऐसा नहीं करना संवैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन माना जाएगा| संविधान का अनुच्छेद 164 (1-ए) कहता है कि किसी भी राज्य का मंत्रिपरिषद उसके विधायकों की कुल संख्या का 15 फीसदी होना ही चाहिए| यह मंत्रियों की अधिकतम संख्या होगी| किन्तु किसी भी परिस्थिति में मंत्रिमंडल में 12 से कम मंत्री नहीं हो सकते| यही कारण है कि गोवा जैसे राज्यों में विधायकों की संख्या कम होने के बावजूद 12 मंत्रियों का प्रावधान है|

सूबे की पूर्ववर्ती सरकारों के गठन और संचालन में उपरोक्त मुद्दे से जुड़े नजीर होने के बावजूद वर्तमान महामहिम राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू द्वारा मुख्यमंत्री रघुवर दास को इस बात के लिए बाध्य नहीं किया जाना कि वे रिक्त बारहवें मंत्री पद की नियुक्ति कर लें, राजभवन की बेबसी ही दर्शाता है| चूंकि राज्यपाल ने संविधान की रक्षा की शपथ ली है और यह मामला उन्ही के अधीन आता है तो राजभवन से सख्ती की अपेक्षा स्वभाविक है|

उल्लेख अप्रासंगिक नहीं होगा कि संविधान के अनुच्छेद 156 में एक अजीब विरोधाभास देखने को मिलता है। अनुच्छेद के खंड (1) में कहा गया है कि राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यंत काम करेगा, लेकिन वहीं खंड (3) में बताया गया है कि उसका कार्यकाल पांच साल का होगा। राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यंत काम करने का तात्पर्य है जब भी चाहे केंद्र की सरकार चाहे उसे हटा सकती है। अब सवाल यह भी उठने लगे हैं कि क्या महामहिम द्रौपदी मुर्मू दिल्ली दरबार के दबाब में मुख्यमंत्री रघुवर दास पर 12 वें मंत्री की अविलम्ब नियुक्ति का दवाब नहीं बना पा रहीं? क्या संविधान का संरक्षक इतना निरीह होना चाहिए? कमोबेश यही दशा फ़िलवक्त झारखण्ड के राजभवन की देखने को मिल रही है|

गठन काल से लेकर अबतक कई गलत कारणों को लेकर सुर्खियां बटोरते रहे झारखण्ड में इस दफ़ा वर्तमान राज्यपाल महामहिम द्रौपदी मुर्मू का निरीह रवैया चर्चा का विषय बना हुआ है| फ़िलहाल झारखण्ड में संविधान के संरक्षण की शपथ लेने वाले राज्यपाल पद पर आसीन द्रौपदी मुर्मू का मौन एक निरीह राजनीतिक इतिहास लिखता ही दिख रहा है|

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *