हेमंत सोरेन को आदिवासियों की बात करने का नैतिक हक नहीं : लुईस मरांडी

समाज कल्याण महिला एवं बाल विकास मंत्री लुईस मरांडी ने बयान जारी कर कहा है कि सोरेन परिवार ने झारखंड में आदिवासियों को सिर्फ ठगने का काम किया है. उन्होंने ना सिर्फ संथाल बल्कि छोटानागपुर क्षेत्र में भी झारखंडियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया. सोरेन परिवार ने सत्ता में रहते संथाल में कभी झांका नहीं. इन्होंने संथाल को अपने हाल पर छोड़ दिया. आज अगर संथाल में सड़क, पुल, बिजली जैसी आधारभूत सुविधाएं पहुंची है तो वह भाजपा सरकार के पिछले 5 सालों के कार्यों की वजह से है. अगर भाजपा की सरकार ना होती तो अब भी संथाल वैसा ही पिछड़ा इलाका होता.
लुईस मरांडी ने कहा कि सोरेन परिवार ने जल जंगल जमीन विस्थापन जैसे मुद्दों के साथ आदिवासी समाज का ध्रुवीकरण करने की कोशिश की. बाहरी भीतरी का खौफ दिखाकर झारखंड को बांटने की कोशिश की. कभी झारखंड या आदिवासियों का विकास नहीं किया. इनका काम क्या रहा? यहां की जमीनें हड़पीं. करोड़ों की संपत्ति बनाई. मुंबई के ठेकेदारों के हाथों यहां का बालू तक बेच डाला और ये लोग बात करते हैं झारखंड की. हेमंत को बताना चाहिए कि सत्ता में रहते झारखंडियों के लिए क्या किया? कितने लोगों को नौकरी दी? कितने विस्थापितों को बसाया? संथाल में विकास के लिए क्या किया? क्या यह सच नहीं कि कि सोरेन परिवार ने खुद ही सीएनटी एसपीटी एक्ट का उल्लंघन कर आदिवासियों की जमीनें हड़पी? अगर हेमंत सोरेन और उनके परिवार के पास इन सवालों के जवाब नहीं है तो उन्हें कोई नैतिक हक नहीं बनता कि वे झारखंडियों या आदिवासियों की बात करें.

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