हंगामा है क्यों बरपा…थोड़ी सी जो पी ली है

-झारखण्ड में सस्ती सियासत, महंगी शराब

झारखंड में शराब को लेकर सियासत शुरू हो गई है, इस सियासत के कई किरदार हैं, लेकिन इस सियासी ड्रामे में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं शासन के एक बड़े अधिकारी. यह सियासत इतनी गहरा गयी है कि मुख्यमंत्री तक को सफाई देनी पड़ रही है. मुख्यमंत्री कहते फिर रहे हैं कि क्रमिक तरीके से शराब की बिक्री बंद की जायेगी. ऐसे में हमने जानने की कोशिश की कि आखिर हंगामा क्यों बरपा.
जानकार बता रहे हैं कि यह पूरा मामला उत्तरप्रदेश चुनाव से जुड़ा हुआ है. चुनाव में केंद्र सरकार को चाहिए थी मदद, ऐसे में इस मुद्दे के बदले हुआ यह खेल. अब खेल तो खेल है. इसमें हर कोई परेशान है, मंत्री तो मंत्री, निचले स्तर के कार्यकर्ता भी कह रहे हैं कि सरकार के पास ऐसी कौन सी मजबूरी है जो सरकार शराब बेचना चाह रही है, जबकि उनके ही आका ने गुजरात में शराबबंदी कर एक मैसेज लोगों के बीच दिया था कि हमें राजस्व नहीं लोगों से प्यार है. इसके ठीक उलट झारखंड में चीजें विपरीत धारा में बह रही हैं , और कैबिनेट के अंदर लोगों को कहा जा रहा है कि सरकार बेचेगी शराब तो उससे होगा सैकड़ों करोड़ का लाभ.
सूत्र बता रहे हैं कि सारी पटकथा एक सस्पेंस फिल्म की तर्ज पर लिख दी गई है. जिस सस्पेंस में अभी चीजें धुंधली नजर आ रही हैं. लेकिन फिल्म की कहानी के अंत में इस पर से पर्दा पूरी तरह से उठ जाएगा और फिल्म में मुख्य किरदार निभाने वाले लोग सामने आ जायेंगे. आने वाले समय में शराब के किंग रह चुके पोंटी चड्ढा ग्रुप इसमें मुख्य किरदार निभाएंगे. संभावना जताई जा रही है कि उनके साथ अन्य सहयोगी की भूमिका में एक वरिष्ठ IAS के सुपुत्र भी रहेंगे. बस इसी बात को कोई सियासतदार पचा नहीं पा रहे हैं कि कहीं शराब सरकार की सेहत के साथ-साथ उनकी सियासत पर भी तो ग्रहण नहीं लगा देगी. जो हो, इतना तो तय है कि शराब के खेल ने सरकार के अंदर के खेल को बिगाड़ कर रख दिया है. दूसरी तरफ सरकार के मुखिया यह समझाने में जुटे हैं कि यहां आने वाले समय में शराब को बिहार की तर्ज पर पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा. जब इच्छा बंद करने की है तो ऐसे में यह फैसला इतनी तत्परता से क्यों लिया गया.

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