सुप्रीम कोर्ट में शाहीन बाग मामले की सुनवाई दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद

पिछले 60 दोनों से शाहीन बाग़ में सीएए-एनआरपी को लेकर हो रहे प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई होनी थी.लेकिन कोर्ट ने सोमवार तक के लिए टाल दिया है. कोर्ट ने कहा  विधानसभा चुनाव बीत जाने दीजिये. थोड़ी देर चली सुनवाई के दौरान यह माना कि प्रदर्शन से लोगों को दिक्कत हो रही है, लेकिन कोर्ट का कहना था कि दिल्ली में चुनाव के मद्देनजर सुनवाई आज करना उचित नहीं होगा.

शाहीन बाग के प्रदर्शन पर को लेकर वकील अमित साहनी और बीजेपी नेता नंदकिशोर गर्ग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. मामला आज जस्टिस संजय किशन कौल और के एम जोसेफ की कोर्ट के सामने लगा. बहस की शुरुआत वकील अमित साहनी ने की. उन्होंने कहा, “लगभग 2 महीने से प्रदर्शन जारी है. कालिंदी कुंज के रास्ते नोएडा को जाने वाली सड़क बंद हैं. लोगों को इससे भारी समस्या हो रही है. लेकिन प्रशासन इसे लेकर कोई कदम नहीं उठा रहा है.”

इस पर बेंच की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस कौल ने कहा, “हम समझ सकते हैं कि लोगों को भारी दिक्कत हो रही है, लेकिन सुनवाई सोमवार को होगी. बीजेपी नेता नंदकिशोर गर्ग की तरफ से पेश वकील शशांक देव सुधि ने कोर्ट से आज ही सुनवाई करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा, “दिल्ली में कल चुनाव है. इसलिए, सुनवाई आज ही होनी चाहिए.”

वकील की इस मांग पर दोनों जज मुस्कुरा दिए. जस्टिस कौल ने कहा, “कल चुनाव है इसलिए, तो हम आज सुनवाई नहीं कर रहे हैं. इसकी क्या जरूरत है कि सुनवाई आज ही की जाए? कल का दिन बीत जाने दीजिए. सोमवार को हम भी मामले को समझने के लिए बेहतर स्थिति में होंगे.” कोर्ट की इस टिप्पणी से साफ था कि इस मसले पर हो रही राजनीति से जज भी वाकिफ हैं. वह नहीं चाहते कि दिल्ली में हालात बिगड़ें या सुनवाई के दौरान कही गई बातों का कोई राजनीतिक इस्तेमाल हो सके.

सुनवाई के अंत में जजों ने यह भी कहा कि मामले को दिल्ली हाईकोर्ट ही देखे तो बेहतर होगा. इस पर वकील अमित साहनी ने कोर्ट को बताया कि वह पहले हाई कोर्ट जा चुके हैं. हाई कोर्ट ने सड़क से जाम हटाने को लेकर कोई भी स्पष्ट आदेश नहीं दिया था. इस पर जजों का कहना था, “आपकी मांग है कि हाईकोर्ट के कोई वर्तमान जज शाहीन बाग के हालात पर निगरानी रखें. ऐसे में, मसला अगर हाईकोर्ट ही देखे तो उचित होगा. सोमवार को आप दोनों इस बिंदु पर भी बहस की तैयारी करके आइएगा कि मामले को क्यों ना दिल्ली हाईकोर्ट भेज दिया जाए?”

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