संताल लिखेगा झारखण्ड का पोलिटिकल सटायर

झारखंड के सभी राजनीतिक दलों के लिए 2019 में संताल परगना क्षेत्र केन्द्र में रहेगा। इसे देखते हुए संताल की जमीन पर अपनी-अपनी पार्टी का झंडा लहराने के लिए सभी दल अभी से ही जी जान से लग गये है। राजनीतिक पंडितों की मानें तो संताल की 18 विधानसभा क्षेत्र इस बार किसी भी दल के लिए कई मायनों में चुनौतीपूर्ण होना जा रहा है। झारखंड की सत्ता पर काबिज होने के लिए संताल से ही रास्ता जाता है।

सतारूढ भाजपा ने इस नब्ज को भांप लिया है और इसलिए वह अभी से ही मिशन 2019 फतेह करने की जुगत में जुट गयी है। संताल परगना में भाजपा ने एक प्रकार से विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू भी कर दी है। भाजपा इस बार वैसी सीटों पर ज्यादा ध्यान दे रही है, जहां आज तक कमल नहीं खिला है। वैसे एरिया को चिन्हित कर पार्टी वहां विशेष रणनीति के तहत आगे बढ़ रही है। संताल के उन इलाकों को चिन्हित कर पार्टी ने वहां पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं को वोटरों की मानसिकता को भांपने में लगा दिया है। पाकुड़, साहिबगंज आदि के क्षेत्रों मे लगातार जनजातीय व अल्पसंख्यक चेहरे को उतारा जा रहा है। इस मुकाबले मुख्य विपक्षी पार्टी झामुमो अभी कमजोर दिख रही है। इसके कई कारण भी हैं, यहां परम्परागत वोट बैक रहा है। झामुमो का वोटर परम्परावादी सोच का रहा है। वह चुनाव के ठीक पहले अपने आप को तैयार करता हैं। झामुमो इस बात को जानता है, इसलिए वह अपने वोटरों को समय आने पर ही चोट करता है। इन दोनों के बीच में आजसू व कांग्रेस अवसर तलाश कर रास्ता निकालने की जुगत में है।

संताल में आजसू का पूरा ध्यान पांच से छह सीटों पर ज्यादा है, खासकर जहां कुरमी समाज ज्यादा है। पार्टी इसलिए उन सीटों पर अभी से ही ध्यान दे रही है। आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो लगातर उन क्षेत्रों का दौरा कर कुरमी समाज को लामबंद कर रहे हैं साथ ही उनका मुख्य फोकस अपने पार्टी के परम्परागत वोटरों के अलावा युवाओं पर है। संताल में केला छाप को स्थापित करने के लिए आने वाले समय में आजसू कोई बड़ा फैसला लेकर पूरे राज्य को मैसेज दे सकती है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो चुनाव के ठीक साल भर पहले पार्टी रघुवर सरकार को बाय- बाय बोल दें। इसके कई राजनीतिक मायनें भी हैं। इस कदम के जरिये पार्टी जनता के बीच यह संदेश देना चाहेगी कि वह रघुवर सरकार के पाप की गठरी को अब साथ लेकर नहीं चलेगी। रघुवर सरकार के कार्यकाल में एक समुदाय विशेष को निशाना बनाने की घटना हो या फिर एनटी-एसपीटी एक्ट को लेकर वितंडा खड़ा होना हो इन सब चीजों से पार्टी अलग होने की कोशिस कर जनता के मन में अपनी जगह बनाने की कोशिश करेगी। विकास योजनाओं में जिस प्रकार भष्टाचार चरम पर है और पार्टी कार्यकर्ताओं का विरोध सतारूढ़ दल को सहना पड़ रहा है। ऐसे में आजसू अभी से ही पूरे राजनीतिक माहौल को भांपकर कोई बड़ा फैसला कर सकती है।
हालांकि आजसू के इस कदम से उसे कितना फायदा मिलेगा यह तो आने वाला समय ही बतायेगा।

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