मोदी सरकार के 100 दोनों में जनता की मुश्किलें बढ़ी :रामेश्वर उराँव

देश कांग्रेस अध्यक्ष डाॅ. रामेश्वर उरांव ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार के 100 पूरे हो चुके हैं.इस एक सौ दिनों में सबसे जन विरोधी नीति मोटर व्हीकल्स एक्ट संशोधन अधिनियम का तुगलकी कानून है.साथ ही विपक्ष को लगातार प्रताड़ित करना यह मोदी सरकार की गलत नीति है. वे सोमवार को प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि राज्य की भाजपा सरकार के मुखिया के नाम से घर-घर जाने का कार्यक्रम प्रदेश में आरंभ हो गया है। कांग्रेस पार्टी का मानना है कि अगर भाजपानीत सरकारों ने झारखंड व देश के जनता के हित में कोई कार्य किया होता तो वो स्वंय जनता के दिलों में घर कर गये होते। उन्हें इस प्रकार के स्वांग रचने की आवश्यकता कतई नहीं होती। 

श्री  उराँव ने कहा कि  केन्द्र सरकार की गलत नीतियों के कारण आर्थिक मंदी के बुरे दौर से गुजर रहा है। लोग रोजगार विहिन हो रहे हैं. ऐसे में सिर्फ दुर्घटना रोकने एवं लोगों को जिम्मेदार नागरिक बनाने के नाम पर मोटर व्हीकल जुर्माना राशि में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि  एवं उसकी वसूली के नाम पर भयादोहन कर आमजनता को अंग्रेजी हुकुमत को याद दिला रही है। इस कानून में संशोधन के नाम पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा, राज्य सरकार को चाहिए कि अविलम्ब इस कानून के अनुपालन पर रोक लगाते हुए इसमें संशोधन करें।

 हमारी सरकार राजस्थान, छतीसगढ़, पंजाब और मध्यप्रदेश में है, वहां इस पर रोक लगा दी गई है।

लोकसभा चुनाव के बाद केन्द्र की सरकार से यह उम्मीद थी कि आम आदमी के हित में कोई काम होगा, आम लोगों के जिंदगी में कुछ राहत मिलेगी, लेकिन स्थिति इसके बिल्कुल उलट है, आम आदमी की मुश्किलें लगातार बढ़ रही है। महिलाओं के खिलाफ लगातार अत्याचार के मामले बढ़ें हैं, शिक्षा और स्वास्थ्य के संबंध में कोई स्पष्ट नीति या नियत दिखती नहीं है। छोटे व्यापारी सरकार के गलत निर्णय एवं नीतियों के कारण त्रस्त है। राजनैतिक विरोधियों के विरूद्ध विद्वेश की राजनीति स्पष्ट दिखती है। झारखंड में बन्धु तिर्की की गिरफ्तारी और ढुलू महतो के गिरफ्तारी पर माननीय उच्च न्यायालय के संज्ञान के बावजूद गिरफ्तारी पर रोक इस बात का स्पष्ट प्रमाण है। ईडी, इन्कम टैक्स एवं सीबीआई संस्थाओं का दुरूपयोग निहित राजनैतिक स्वार्थ पूर्ति के लिए किये जा रहे हैं। जी.डी.पी. पांच प्रतिशत पर पहुंच गई है, बैंकों के एनपीए लगातार बढ़ रहे हैं। विकास दर पिछले 5 तिमाही से लगातार गिर रहा है। जो कि 8 प्रतिशत से गिर कर 5 प्रतिशत पर आ गया है। सरकार के बही-खाते का हिसाब किताब देखने वाले सीएजी के रिपोर्ट में टैक्स संग्राह का ग्रोथ 14 प्रतिशत बताया गया है जो 2009 के बाद सबसे धीमा है।  कानून व्यवस्था का बुरा हाल है। इंडस्ट्रीयल ग्रोथ 45 वर्षों में सबसे नीचे पायदान पर पहुंच गई है। लगभग साढ़े तीन लाख लोगों की नौकरियां चली गई है। अकेले आॅटोमोबाइल सेक्टर के उत्पादन में 38 से 40 प्रतिशत की गिरावट हुई।

उन्होंने कहा कि  झारखंड में महंगी बिजली दरों के कारण पिछले 100 दिन में लगभग 100 स्टील कंपनियां बन्द हो चुकी है। जमशेदपुर में सैकड़ो एनसीलीयरी यूनिट बंद हो चुके हैं। हजारों परिवार सड़क पर आ चुके हैं, एक कंपनी पर औसतन 1500 परिवार का भरण-पोषण होता है लेकिन राज्य की जुमलेबाज सरकार की संवेदनहीनता खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। 

झारखंड में कर्मचारियों को वेतन के भी लाले पड़े हैं। दो लाख सरकारी कर्मियों को महीनों से वेतन नहीं मिल पाया है, सरकार के पास वेतन देने के लिए पैसे नहीं लेकिन चुनावी फायदे के लिए लोक-लुभावन घोषणनाऐं कर जनता को गुमराह करने में लगी हुई है। सरकार में बैठे लोग वोट के एवज में प्रलोभन और सौदेबाजी कर रहे है। 88 हजार आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका एवं पोषणसखी तथा 67 हजार पारा शिक्षक आंदोलनरत है, जिससे बच्चों का बुरा हाल है।

गरीब जनता की गाढ़ी कमाई के टैक्स के पैसे का दुरूपयोग करने में लगी झारखंड सरकार के उपर लगभग हजार करोड़ का बिल पेंडिंग है। सरकार मनरेगा मजदूरों को पैसा देने में असफल साबित हो रही है। मनरेगा मजदूरों का लगभग 120 करोड़ रूपया का भुगतान सरकार पर बकाया है। सरकार की वित्तीय अराजकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सरकार ने 2019-20 के लिए जहां 85429 करोड़ रूपेया का बजट लाया  था वहीं सरकार के उपर 85234 करोड़ का कर्ज का अनुमान लगाया गया है।

भ्रष्टाचार चरम पर है, जिस तरह से भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं उससे यह प्रमाणित होता है कि रघुवर दास की सरकार जुमलेबाज सरकार साबित हो रही है।  जीरो टाॅलरेंस के नाम पर भ्रष्टाचार का पालन पोषण हो रहा है। जेवीएनएल के प्रबंध निदेशक पर भ्रष्टाचार के जिस प्रकार से आरोप लगे और मामला राज्य के सर्वोच्च पंचायत में भी आया, इसी विभाग के एक्स सीएफओ का जिस प्रकार से संरक्षण दिया गया था वह सामान्य घटना नहीं है। यह विभाग स्वंय मुख्यमंत्री का है, जिसमें 32 करोड़ के टीडीएस घोटाले के आरोपी को पुरस्कृत किया जाना अपने आप में इस बात को प्रमाणित करता है। मैनहर्ट का मामला हो या कंबल घोटाला जिसमें स्वंय पूरी सरकार संदेह के घेरे में है।

राज्य में पिछले पांच वर्षों में भूखमरी से लगातार मौतों का सिलसिला जारी है और सरकार के खाद्य आपूर्ति मंत्री अपनी जिम्मेवारियों से पल्ला झाडते हुए स्वास्थ्य विभाग के उपर दोषारोपण कर रहे हैं। दो दर्जन से ज्यादा मौंते भूखमरी से हुई, जिसमें सबसे ज्यादा आदिवासी समाज के लोगों की मौत हुई है। आखिर किस बिना पर सरकार खुद को आदिवासियों के हितैषी बताने में लगी हुई है। राज्य में विकास के नाम पर आदिवासियों की जमीनें अधिग्रहित की गई है। जिनका मुआवजा भी रैयतों को अब तक नहीं मिल पाया है। ट्राइबल सब-प्लान का पैसा कहां खर्च हो रहा है यह जनता को बताना चाहिए। आदिवासी जब अपने संविधान प्रदत्त अधिकारियों के रक्षार्थ आंदोलन करते हैं तो उन्हें झूठे मामलों में फंसाकर उनपर केस दर्ज कर दिया जाता है जो निंदनीय है। 

रोजगार मुहैया कराने के नाम पर प्रदेश की जनता को गलत आंकड़े पेश कर लगातार गुमराह किया जा रहा है। जबकि सच्चाई ये है कि आज भी झारखंडी नौजवान रोजगार के लिए पलायन एवं आत्महत्या को मजबूर हैं लेकिन तानाशाह सरकार पर इसका कोई असर नहीं हो रहा है। 

24 घंटा बिजली मुहैया करवाने का दवा करने वाले मुख्यमंत्री के कार्यकाल में जब मुख्यमंत्री बिजली विभाग की समीक्षा बैठक कर रहे होते हैं उसी समय शिक्षा विभाग के एक सरकारी समारोह के दौरान बिजली गुल होने का मामला राज्य में लचर विद्युत व्यवस्था को प्रमाणित करने के लिए काफी है। ज्ञात हो कि बिजली मुहैया कराने में नाकाम रहने पर जनता से वोट न मांगने का दवा करने वाले मुख्यमंत्री को यह बताना चाहिए कि वो विधानसभा चुनाव में कम से कम बिजली के नाम पर जनता से वोट नहीं मांगेंगे।

राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। सरकार एवं पुलिस प्रशासन का इकबाल सिर्फ आम नागरिकों से जुर्माना वसूलने में दिखाई देता है। अपराधियों एवं उपद्रवियों के हौसले बुलंद हैं। सिर्फ इस वर्ष में अगस्त तक 44 लोगों पर भीड़ द्वारा हिंसा की गई है। पिछले 100 दिन में भीड़ द्वारा की गई हिंसा की संख्या 20 है। यह भी राज्य सरकार की एक उपलब्धि हीं है।  

इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस कमिटी के कार्यकारी अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, राजेश ठाकुर, संजय लाल पासवान, प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद, लाल किशोर नाथ शाहदेव, डाॅ राजेश गुप्ता मौजूद थे।

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