भाजपा सांसदों की धड़कनें तेज़

लोकसभा चुनाव की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आ रही है भाजपा के कई सांसदों की धड़कन तेज हो गई है.यह धड़कन चुनाव में जीत हार की नहीं है बल्कि इसबार उन्हें पार्टी दुबारा टिकट देगी कि नहीं यह बात दिन-रात उन्हें सता रही है. कई सांसद तो प्रदेश कार्यालय के पदाधिकारियों से हेलो-हाय करने के बहाने टिकट की भी चर्चा करने से पीछे नहीं हट रहे हैं.और तो और कई सांसद अपने क्षेत्र के कार्यकर्ताओं को प्रतिदिन प्रदेश कार्यालयों के चक्कर लगाने और वहां की गतिविधि की पल-पल की जानकारी ले रहे हैं.

झारखण्ड में लोकसभा की कुल 14 सीटें है.उसमे से एक सीट गिरिडीह भाजपा ने आजसू को दे दिया है.गिरिडीह से सांसद रविन्द्र पाण्डेय का इसबार पत्ता साफ हो गया है.शेष 13 सीटों के लिए प्रदेश और केन्द्रीय चुनाव समिति को प्रत्याशियों का चयन करना है. इसबीच शुक्रवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में चुनाव समिति की बैठक हुई.इसमें  प्रदेश लोकसभा प्रभारी मंगल पांडेय,प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ,संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह,मुख्यमंत्री रघुवर दास, अर्जुन मुंडा ,संसदीय कार्य मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा,दीपक प्रकाश सहित कई पदाधिकारी शामिल हुए.बैठक में मौजूदा सांसदों के बीते पांच सालों के कार्यकाल की चर्चा हुई.साथ ही संबंधित क्षेत्र से पार्टी के स्थानीय उम्मीदवारों की भी चर्चा हुई.सूत्रों की माने तो बैठक में चुनाव समिति के कई सदस्यों ने सभी 13 लोकसभा सीट पर फ्रेश कैंडिडेट देने की बात कही.उनमे से कई सदस्यों ने इसपर एक बार फिर से विचार करने की बात कही.कई सदस्यों ने कहा कि पिछली बार मोदी लहर में सभी निकल गये लेकिन इसबार मुकाबला टफ होगा.ऐसे में सोच समझकर बेहतर और जिताऊ प्रत्याशियों को ही टिकट दिया जाना चाहिए. 

राजनीतिक जानकारों की माने तो झारखण्ड की सभी 14 लोकसभा क्षेत्रों में केन्द्रीय चुनाव समिति ने दो महीने पहले ही सर्वे करा लिया था.उस सर्वे में आधे से अधिक सांसदों का रिकॉर्ड बेहतर सामने नहीं आया था.सर्वे टीम के सदस्य लोकसभा क्षेत्र की आम जनता,एनजीओ,मीडिया और स्टूडेंट से सांसदों के बारे में चर्चा किया था.टीम सदस्यों ने अपनी रिपोर्ट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और पीएम मोदी को सौप दिया था. रिपोर्ट देखने के बाद ही भाजपा अध्यक्ष ने सभी सभी राज्यों के भाजपा अध्यक्ष और भाजपा शासित राज्यों के मुख्मंत्री को दिल्ली तलब कर उनके साथ बैठक किया था.उस बैठक के बाद ही प्रदेश के कई सांसदों को यह आभास हो गया था कि शायद 2019 में उन्हें दुबारा टिकट मिलने की कम संभावना है.वैसे होली के बाद सबकुछ स्पष्ट हो जाएगा.किसे टिकट मिलेगा और किसे टिकट नहीं यह सबको पता चल जायेगा.      

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