भाजपा नेता अजय राय ने झारखण्ड कांग्रेस प्रभारी पर किया पलटवार, कहा- पहले अपने गिरेबान में झांक कर देखें

झारखंड प्रदेश भाजपा मीडिया प्रबंध समिति के सदस्य अजय राय ने कहा कि कांग्रेस के झारखंड प्रभारी आरपीएन सिंह पहले अपने गिरेबान में झांक कर देखें की उनके प्रभारी रहते कितने प्रदेश अध्यक्ष पार्टी छोड़े ,और कितने छोड़ने वाले है । उन्होंने कहा कि श्री सिंह को झारखंड में विकास नजर नहीं आता है और न उनके नेता राहुल गाँधी को उन्हें सिर्फ ठगबंधन के तहत इस  राज्य को कैसे लूटना है यहाँ के कोंग्रेसियो को कैसे लूटना है ये नजर जरूर आता है । उन्होंने कहा कि  राज्य की रघुवर और केंद्र की मोदी सरकार ने आदिवासी कल्याण के जितने काम इस राज्य में  किए हैं, जो आज वो मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। उन्होंने केंद्र एवम राज्य सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए ये आकड़ा पेस किया जिसके तहत — – 2014 तक जनजातियों के लिए बजट सिर्फ 11,997 करोड़ का था जो अभी बढ़कर 20,764 करोड़ लगभग दो गुणा हो चुका है। – पहली बार आदि मेंवासी बहुल ग्रामों में आदिवासी ग्राम विकास समिति तथा दूसरे गांवों में ग्राम विकास समिति का गठन कर पाँच लाख रूपये तक के विकास कार्य को करने का अधिकार दिया गया है। – 2014 तक सिर्फ 647 जाहेर स्थान/सरना/ मसना स्थलों की घेराबंदी की गई थी। अब यह बढ़कर 1,597 हो चुकी है। – पहली बार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के युवाओं को यू0पी0एस0सी0 सिविल सर्विसेज की प्रारंभिक परीक्षा पास करने पर 1 लाख रूपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। – आदिवासियों के लिए 2014 तक मात्र 18943 वनाधिकार पट्टा निर्गत हुआ था। पिछले पाँच साल में 61,970 लाभुक को 1,04,066 एकड़ भूमि का पट्टा दिया गया है।- पहली बार झारखण्ड पुलिस में पहाड़िया समुदाय के लिए दो बटालियन का गठन किया गया।- आदिवासियों के लिए प्रथम अनुसूचित जनजाति आयोग का गठन किया गया। – राज्य में पहली बार अनुसूचित जाति आयोग का गठन करते हुए उसे कार्यरत किया गया है।- 521 आदिवासी संस्कृति केंद्र, मांझी-मानकी हाउस, धुमकुड़िया इत्यादि केंद्र का निर्माण कराया गया है। – राज्य में 25 नये एकलव्य आवासीय विद्यालय बनाये जा रहे हैं।- 424 करोड़ रुपये की लागत से 11,126 अनुसुचित जनजाति बहुल टोलों में पाइप लाइन के माध्यम से पेयजल आपूर्ति की जा रही है।- राज्य में पहली बार परंपरागत ग्राम प्रधान, दिउरी, मानकी, मुंडा, डकूआ, परगणैत, पराणिक, जोगमांझी, कुड़ाम, नायकी, गोड़ैत, मूल रैयत, पड़हा राजा, ग्राम सभा का प्रधान, घटवाल व तावेदार को प्रतिमाह सम्मान राशि दी जा रही है।- मानकी, मुंडा एवं ग्राम प्रधानों के बीच 7711 टैबलेट का वितरण राजस्व कार्य के लिए वितरित किये गये हैं। – टाना भगतों को मुख्य धारा में लाने व उनके विकास के लिए टाना भगत विकास प्राधिकार का गठन किया गया है।- रांची में टाना भगत अतिथि गृह का निर्माण चल रहा है।- रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय में 60 छात्र-छात्राओं का सर्टिफिकेट इन पुलिस साइंस में नामांकन कराया गया है।- टाना भगतों की भूमि पर वर्ष 1956 से भुगतेय सेस राशि को माफ किया गया है और लगान तथा सेस निशुल्क कर दिया गया है।- 335 टाना भगतों को निशुल्क चार-चार गायों का वितरण किया गया है।- अनुसूचित जनजाति समुदाय के उद्यमियों व निवेशकों को रियायती दर पर सरकारी जमीन व अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं।
– पहली बार सभी आदिम जनजाति परिवारों को मुख्यमंत्री डाकिया योजना अन्तर्गत 35 किलो अनाज प्रत्येक माह उनके घर तक पहुँचाने का कार्य सरकार द्वारा प्रारंभ की गई है। इस योजना से 73,386 परिवार लाभ ले रहे हैं।- संथाली ओलचिपी लिपि को सरकारी मान्यता दी गयी तथा इसे प्रोत्साहित किया जा रहा है।- संथालों के प्रमुख तीर्थ स्थल लुगुबुरु घंटबाड़ी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर यहां लगनेवाले मेले को राजकीय मेले का दर्जा दिया गया।- 136 करोड़ रुपये की लागत से 2251 आदिम जनजाति टोलों के लिए पेयजल आपूर्ति की योजना चलायी जा रही है।

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