बेरमो की जनता में असमंजस की स्थिति, युवा को चुने या बुजुर्ग प्रतिनिधि को,चर्चा का बाजार गर्म

बेरमो और दुमका में अब मतदान की तिथि करीब है.सत्तापक्ष और विपक्ष ने अपनी -अपनी ताकत झौक दी है. दोनों ही सीटों पर 3 नवम्बर को मतदान होना है. बेरमो और दुमका में मुख्य मुकाबला कमल और हाथ में है.वहीँ कुछ अन्य राजनितिक पार्टी के प्रत्याशी भी जो लोकल हैं,वह भी रेस में हैं. हालाँकि,शुरूआती दौर में ऐसा लग रहा था कि कोरोनाकाल में शासन-प्रशासन की अनदेखी और सख्ती से लोगों में उपजी नाराजगी के सामने प्रत्याशी को एड़ी-चोटी का जोर लगाना होगा,पर ऐसा हुआ नहीं.चुनाव आते ही लोग सब भूल गये और क्षत्र के विकास से शुरू हुई चर्चा जाट-पात पर जा अटक गई है. इस चुनाव में विकास तो मुद्दा है ही.साथ ही बाहरी और भीतरी और युवा और बुजुर्ग जनप्रतिनिधि का है.दरअसल कांग्रेस के अनुप सिंह युवा है और भाजपा के योगेश्वर बाटूल बुजुर्ग हैं. बेरमो में कुर्मी और राजपूत वोटरों की संख्या अधिक है.इसमें ज्यादातर बाहर के लोग हैं,जो यहां बसे हैं.बेरमो में महागठबंधन से कांग्रेस के कद्दावर नेता स्व.राजेन्द्र प्रसाद सिंह के पुत्र कुमार जयमंगल सिंह हैं.वहीँ 2014 के चुनाव कांग्रेस के राजेन्द्र सिंह को पराजित करने वाले भाजपा के योगेश्वर महतो को इसबार पार्टी ने उम्मीदवार बनाया है.इनदोनों के वोट में सेंधमारी करने के लिए हाथी छाप से लालचंद महतो और राष्ट्रीय जनसंघर्ष स्वराज पार्टी से पंकज प्रसाद मैदान में हैं.राष्ट्रीय संघर्ष स्वराज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीरेंद्र कुमार जायसवाल पूर्व में प्रदेश कांग्रेस में ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष रह चुके हैं.कांग्रेस से निकलने के बाद उन्होंने अपनी नई पार्टी बनाई.बेरमो सीट से उन्होंने पंकज प्रसाद को प्रत्याशी बनाया है.पंकज प्रसाद इससे पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं.साथ ही इनका सामाजिक क्षेत्र में काफी अच्छा योगदान रहा है.इसके अलावा एक निर्दलीय से भी महतो उम्मीदवार खड़ा है.यह सभी कांग्रेस और भाजपा वोट में नुकसान कर सकता है.इसबात की भी चर्चा है कि कुर्मी और राजपूत वोट जिधर रुख कर लेगा,जीत उस उम्मीदवार की तय है.बेरमो शहरी क्षेत्र में भाजपा का वोटर अधिक है.वहीँ ग्रामीण क्षेत्र में करीब-करीब कांग्रेस और भाजपा के वोटर हैं.इसबार राजपूत का वोट तो कांग्रेस प्रत्याशी अनुप सिंह को मिलेगा ही,साथ ही साथ राजेन्द्र बाबू का सांत्वना वोट भी अनुप सिंह को अन्य जाति का मिलेगा.यदि ऐसा हुआ तो अनुप सिंह की जीत तय है.सांत्वना वोट को कम करने के लिए भाजपा और आरएसएस के लोग गांव-गांव कैंप कर रहे हैं.पार्टी ने बेरमो सीट को जीतने के लिए कई केन्द्रीय नेताओं को लगा दिया है.पूर्व मुख्यमंत्री सह वर्तमान में केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा का लगातार उस क्षेत्र में दौरा हो रहा है.यही नहीं राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री सह भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी और पूर्व सीएम रघुवर दास सहित कई भाजपा ने नेता दिन-रात एक कर के इस सीट को हासिल करने की जुगत में हैं. भाजपा के नेता बेरमो और दुमका में केंद्र में भाजपा सरकार की उपलब्धियों को गिना रहे है.साथ ही राज्य सरकार की नाकामियों को उजागर कर रहे हैं.राज्य में विधि लचर विधि व्यवस्था, लगातार हो रही दुष्कर्म की घटनाओं का उल्लेख कर जनता को अपने पक्ष में करने में लगे हुए हैं.राज्य की झामुमो-कांग्रेस सरकार के मुखिया हेमन्त सोरेन दोनों ही सीटों पर अपने प्रत्याशी की जीत के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं.अपने मंत्रिमंडल के सभी मंत्रियों को फिल्ड में उतार दिया है.साथ-ही साथ सही झामुमो के विधायक और एक-एक सक्रीय कार्यकर्ताओं को टास्क दिया गया है.कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ.रमेश्वर उरांव खुद मोर्चा संभाल रहे हैं.यही नहीं कांग्रेस कोटे से कृषि मंत्री बादल,आलमगीर आलम,बन्ना गुप्ता सहित कांग्रेस के सभी विधयाकों और सक्रीय कार्यकर्ताओं को गांव-गांव दौरा कर वोटरों को कांग्रेस के पक्ष में करने में लगे हुए हैं.बेरमो क्षेत्र में आदिवासी वोटों की संख्या है.हालांकि यह सभी झामुमो का परम्परागत वोट है.दोनों सीट पर महागठबंधन के प्रत्याशी को जीतना हेमन्त सरार के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया है.वहीँ इस चुनाव में भाजपा के साथ आजसू और झारखण्ड मुक्ति मोर्चा उलगुलान भी है.इससे भाजपा प्रत्याशी योगेश्वर महतो का भी पलरा भारी दिख रहा है. फिलहाल दोनों ही पार्टी का पालरा बराबर दिख रहा है.मतदान में अभी समय है,माहौल को बदलने और बिगड़ने में अधिक समय नहीं लगता है.लेकिन भाजपा के नेता पुरी तरह से माहौल को अपने पक्ष में करने में लगे हुए हैं. केंद्र में भाजपा की सरकार है और मुखिया नरेंद मोदी हैं तो निश्चित रूप से भाजपा को अधिक लाभ होता दिखाई दे रहा है.वहीँ राज्य में झामुमो- कांग्रेस का शासन होने के बाद भी इसका असर जनता में दिखाई नहीं दे रहा है.इसका मुख्य कारण कोरोनाकाल में लॉक डाउन है.हेमन्त सरकार गठन के कुछ ही दिन बाद कोरोनाकाल आ गया और इधर लॉक डाउन हो गया.इससे राज्य में कोई नयी योजनाओं की शुरुआत नहीं हो पाई.विकास के कार्य बंद हो गये.चारो तरफ बस कोरोना और उससे बचाव के ही चर्चे हुए.सत्ता परिवर्तन के बाद भी जनता को कोई ख़ास लाभ नहीं मिला.इसके अलावा बेरमो और दुमका में शिक्षा,स्वास्थ्य,पानी,सड़क,बिजली,कानून व्यवस्था और बेरोजगारी की समस्या है.इस बारे में कोई बात ही नहीं कर रहा है.लाखों मजदुर अपनी रोजी-रोटी के लिए अन्य राज्यों की और रुख करते हैं.झारखण्ड गठन के 18 साल बाद भी यहाँ पर कोई बड़ी कम्पनी नहीं आई.इससे यहाँ के लोगों को रोजगार नहीं मिला. क्या कहते हैं बेरमो बाजार की जनता : आम जनता फिलहाल कोरोनाकाल के बाद लॉकडाउन होने से अपनी रोजी-रोटी की समस्या से जूझ रहे हैं.एक साल पहले ही चुनाव में अपना वोट दिया था.सोच था परिवर्तन होगा.लेकिन 10 महीने बीतने के बाद भी परिवर्तन नजर नहीं आया.बेरमो फ्लाईओवर के नीचे चाय बेचने वाले रामू दादा की मानें तो चुनाव में सभी नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं. लेकिन चुनाव समाप्त होते ही भूल जाते हैं.गरीबों को वोट लेकर गरीबों को ही भूल जाते हैं.रामू दादा कहते हैं कि राजेन्द्र बाबू अच्छे व्यक्ति थे.पिछली बार हमलोगों ने उनको ही वोट दिया था.लें अब वह इस दुनिया में नहीं रहे.सुना है इसबार उनके बेटा खड़ा हुआ है.एकबार फिर से हमलोग राजेन्द्र बाबू को देखते हुए इसबार वोट उनको ही देंगे.वहीं मिश्रा टोला दुर्गा मंदिर के पास नास्ते का दूकानदार सुखदेव महतो ने कहा कि भाजपा सरकार ने हम गरीबों को मुफ्त में गैस दिया,लॉकडाउन में मुफ्त में अनाज दिया है.हमलोग भाजपा के सिवा किसी और को वोट नहीं देते हैं.यह अलग बात है कि इसबार राजेन्द्र बाबू के निधन के बाद उनका लड़का खड़ा हुआ है.लेकिन वह राजेन्द्र बाबू तो नहीं है.इसतरह तोतरी उतरी,दुग्धा उतरी अन्य टोला के मतदाता शांत हैं. क्या कहते हैं भाजपा के नेता : प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप सिंह की मानें तो झामुमो और कांग्रेस ने चुनाव में जो-जो वाडे किये थे सभी झूठे साबित हो रहे हैं.सरकार बनते ही पहले साल 5 लाख युवाओं को नौकरी देने के वादे को तार तार करने का काम किया है। 5 लाख के बजाए सिर्फ 22 लोगों को नौकरी देकर लाखों का विज्ञापन बेरोजगार युवक युवतियों का अपमान है। विज्ञापन का पैसा नौकरी करने वालों को मिलता तो सैलरी में कुछ बढ़ोतरी हो जाती। 22 लोगों को 10 हजार की नौकरी बेरोजगारों के साथ क्रूर मजाक है। बेरोजगारों को 7 हजार की भत्ता देने का वादा करने वाली हेमन्त सरकार 10 हजार की 22 नौकरी देकर ढिंढोरा पीट रही है। कहा कि आज राज्य में रघुवर सरकार में लगे दो कपड़ा गारमेंट निर्माण उद्योग बंद हो चुके जिससे हजारों लोग बेरोजगार हो चुके।राज्य सरकार को इसकी कोई चिंता नही। श्री सिन्हा ने कहा कि हजारों शिक्षकों की नौकरी सरकार की गलती के कारण अधर में लटक गई है।हताश निराश युवा बेरोजगार आत्महत्या करने को मजबूर हैं।। कहा कि यह सरकार नौकरी देने के बजाए नौकरियां लेने वाली सरकार है। दिशाहीन सरकार की कार्यशैली राज्य की जनता देख रही है।
उन्होंने राज्य की बहू बेटियों के साथ बढ़ते दुष्कर्म पर झामुमो कांग्रेस के नेताओं के बयान पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि राज्य की बेटियां पुलिस से न्याय के लिए गुहार लगाते लगाते मौत को गले लगा ले रही है और झामुमो के नेता लड़कियों को इसके लिए जिम्मेवार ठहराते हैं। कांग्रेस के कई नेता जिनमें कमलनाथ, अशोक गहलोत का बयान काफी शर्मनाक है। इससे झामुमो कांग्रेस के नेताओं की मानशिकता स्पष्ट झलकती है। राजधानी रांची में दुष्कर्म होना, हजरीबाग कि बेटी न्याय नहीं मिलने पर फांसी के फंदे में झूल गयी किंतु बेशर्म सरकार को फर्क नहीं पड़ा। पुलिस के मुखिया कहते हैं राज्य में सब कुछ ठीक है। इधर पुलिस वाले ही बेटियों की इज्जत लूटने में लगे हैं। जनता अब समझ चुकी है और इस उप चुनाव बेरमो और दुमका दोनों सीटों पर भाजपा प्रत्याशी की जीत होगी.वहीँ कांग्रेस प्रवक्ता अभ सिन्हा ने कहा कि पांच साल रघुवर कि भाजपा सरकार कोई भी विकास का काम नहीं किया है.हाथी उड़ाने में पूरा समय बिताया, पारा टीचरों, आंगनवाड़ी सहायिकाओं पर पुलिसिया डंडे बरसाए, राज्य में एक रुपये की जमीन, अपनी बीवी के नाम लिखवाने में आइएएस, आइपीएस की फौज ने जमकर खुराफात मचाई, जिनके शासनकाल में किसानों ने आत्महत्या करना शुरु कर दिया, झारखण्ड राज्य को बर्बाद एवं तबाह कर दिया, वैसे भाजपा के लोग हेमन्त सरकार की क्या गलतियां ढूंढेगें.श्रीमती सिन्हा ने कहा कि भाजपा के लोग विगत् विधानसभा चुनाव में मुंह की खानी के बाद हेमन्त सोरेन की सरकार के नौ महीने बीतने के बावजूद भी अभी तक जनता का विश्वास नहीं जीत सके हैं, जबकि इसके विपरीत जनता का विश्वास अभी भी हेमन्त सोरेन की सरकार के उपर बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि भाजपाइयों द्वारा उपलब्धियां कह-कहकर जिस हेमन्त सरकार का मजाक उड़ाने का प्रयास किया गया, सच्चाई यह है कि झारखण्ड में भाजपाई खुद मजाक बन चुके हैं। उसके मूल में बाबू लाल मरांडी जैसे आयातित नेता है, जो विधानसभा चुनाव तक रघुवर दास को कटघरे में रखते थे, और परिणाम आते ही राजनीतिक भविष्य बेहतर बनाने के लिए भाजपा की गोद में जा गिरे।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने राज्य में अपने कार्यकाल के दौरान राज्य की जनता को केवल ठगने का काम किया है और अपने छुटभैय्ये नेताओ को फायदा पहुंचाने का काम किया है। साथ हीं साथ राज्य में भ्रष्टाचार, कुशासन एवं अराजकता की स्थिति उत्पन्न कर राज्य की जनता को झेलने के लिए छोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा से झारखण्ड ही नहीं पूरे देश की जनता उब चुकी है.इनका धीरे-धीरे पुरे देश से सफाया हो जाएगा.राष्ट्रीय जन संघर्ष स्वराज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीरेंद्र कुमार जायसवाल की मानें तो बेरमो में इसबार जनता भाजपा और कांग्रेस को वोट नहीं करने वाली है.इसबार उनमे परिवर्तन दिख रहा है.केंद्र में भाजपा और राज्य में कांग्रेस और झामुमो की सरकार से जनता को कोई लाभ नहीं मिला है.बेरोजगारी की समस्या बेरमो में अधिक है.

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