बिहार : जलजमाव के साथ महामारी की मार

बिहार की राजधानी पटना में जल जमाव के बाद अब महामारी की मार लोगों को झेलना पड़ रहा है. इससे कई तरह की बिमारियों उत्पन्न होने की स्थिति बन गई है.पनपुन व गंगा में पानी घटने से पटना पर मंडराता बाए़ का खतरा टल गया है। हालांकि, पटना के पॉश इलाके राजेंद्रनगर और पाटलिपुत्र में एक सप्ताह बाद भी तीन फीट तक जलजमाव है। सड़ते पानी से संक्रमण फैल रहा है। हाल यह है कि पटना में डेंगू के मरीजों की संख्‍या आठ सौ का आंकड़ा छूने जा रही है।

हाल की भारी बारिश के बाद हुए जलजमाव से पटना को सात दिनों बाद भी निजात नहीं मिली है। राजेंद्र नगर व पाटलिपुत्र कालोनी सहित कई इलाकों में अभी भी तीन फीट तक पानी जमा है।

राहत व बचाव कार्य अपर्याप्‍त होने के कारण प्रभावित लोगों की स्थिति अभी तक नारकीय बनी हुई है। इस बीच सड़ते पानी व गंदगी ने संक्रमण का खतरा पैदा कर दिया है। बीमारियों में इजाफा हुआ है। पटना में डेंगू महामारी के रूप में फैल गई है।

जलजमाव से परेशान पटना में डेंगू का कहर बढ़ता जा रहा है। पटना मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल (पीएमसीएच) में डेंगू के 83 नए मरीज मिले। सरकारी अस्पतालों के अलावा निजी अस्पतालों में भी काफी संख्या में डेंगू के मरीज भर्ती हैं। पीएमसीएच में अब तक 775 डेंगू के मरीज आ चुके हैं।

पीएमसीएच के उपाधीक्षक डॉ. रंजीत कुमार जैमियार का कहना है कि अस्पताल में डेंगू मरीज की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इमरजेंसी में फिलहाल 20 व शिशु विभाग में भी 10 बेड बढ़ाए गए हैं। इमरजेंसी हेड डॉ.अभिजीत सिंह का कहना है कि आइसीयू में 10 बेड डेंगू मरीजों के लिए रिजर्व किए गए हैं। पटना के सिविल सर्जन डॉ. आरके चौधरी का कहना है कि जिले के सभी प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों पर डेंगू मरीजों की जांच की व्यवस्था की गई है। अगर किसी मरीज को तीन दिन से अधिक दिन तक बुखार रहता है तो वह डेंगू की जांच करा ले।

जलजमाव से जूझते पटना पर मंडराता बाढ़ का खतरा टल गया है। पुनपुन नदी का जलस्तर 53.51 मीटर पर आने से प्रशासन ने राहत की सांस ली है। हालांकि, अभी भी यह खतरे के निशान से 275 मीटर ऊपर है। वहीं गंगा का जलस्तर भी घट रहा है। गया-पटना और वेना-बिहार शरीफ रेलखंड पर परिचालन अभी ठप है। कई ट्रेनें रूट डायवर्ट कर चलाई जा रही हैं।

गुरुवार और शुक्रवार को पुनपुन के 11 रिंग बांध टूटने के बाद कई गांवों में बाढ़ का पानी फैल गया था। इससे करीब 87 हजार लोग प्रभावित हुए हैं। पीडि़तों के लिए प्रशासन की ओर से 33 कम्युनिटी किचेन में भोजन-पानी एवं बच्चों को दूध की व्यवस्था की गई है। जिलाधिकारी कुमार रवि ने मुख्य बांध को सुरक्षित बताया है।

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