प्रदेश कांग्रेस की कमान किसके हाथ ,फैसला 24 को

पिछले दो महीने से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का खली पद को भरने की कवायद तेज हो गई है.लेकिन अंतिम फैसला 24 को आएगा.इसके लिए प्रदेश से कई नेताओं को दिल्ली तलब किया गया है.दरअसल 20 अगस्त को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर देशभर में कांग्रेस कई कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है. वहीं 22 अगस्त को दिल्ली में राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में झारखंड प्रदेश कांग्रेस के नेताओं को भी बुलाया गया है. इसके लिए 21 अगस्त को झारखंड प्रदेश कांग्रेस के नेता दिल्ली रवाना होंगे.

प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता  राजीव रंजन की माने तो  फिलहाल झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी राजीव गांधी की 75वीं जयंती को सफल बनाने के लिए एकजुट होकर काम कर रही है. सभी फिलहाल राजीव गांधी की जयंती को लेकर व्यस्त हैं. ऐसे में जेपीसीसी के अध्यक्ष के मामले पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि इस पर निर्णय आलाकमान लेगा.

वैसे जानकारों की माने तो अध्यक्ष पद की रेस में कांग्रेस विधायक आलमगीर आलम, पूर्व विधायक सह पूर्व लोकसभा प्रत्याशी कालीचरण मुंडा और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सह लोहरदगा विधायक सुखदेव भगत का नाम भी हैं.लेकिन आलमगीर आलम और सुखदेव भगत पर कार्यकर्ताओं का विरोध सामने आया है. और दोनों किसी न किसी गुट से विलोंग करते हैं.लेकिन खूंटी के रहने वाले कांग्रेस के पूर्व विधायक कालीचरण मुंडा किसी गुट से नहीं हैं और साधारण प्रखंड से संघर्ष करते हुए जिला तक पहुंचे हैं. इनके नाम पर कोई भी विरोध नहीं हुआ है. दूसरा यह व्यक्ति आदिवासी चेहरा है और अनुभवी भी हैं. कांग्रेस ऐसे चेहरे को विधानसभा चुनाव में भुनाने से पीछे नहीं हटेगी.लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का खूंटी सीट जीतना तय था. ऐसा हुआ भी था.लेकिन कुछ कतिपय कारणों से उन्हें पराजित घोषित कर दिया गया.उनकी सीधी लड़ाई भाजपा के अर्जुन मुंडा से थी. कालीचरण मुंडा ने अर्जुन मुंडा को कड़ी टक्कर देने का काम किया था.लेकिन उन्हें पराजय हाथ लगी. हालाँकि अपनी हार को कालीचरण मुंडा ने स्वीकार नहीं किया और झारखण्ड उच्च न्यायालय में केस फ़ाइल कर दिया है.कोर्ट में इनकी अर्जी स्वीकार भी कर लिया गया है. और एक बार सुनवाई भी हो चुकी है. कालीचरण मुंडा के पिता स्व.टी मुचिराय मुंडा भी कांग्रेसी थे और एकीकृत बिहार में मंत्री भी थे. उनके छोटे भाई नीलकंठ सिंह मुंडा खूंटी से भाजपा के विधायक सह रघुवर सरकार में ग्रामीण विकास एवं संसदीय मंत्री हैं.कांग्रेस ऐसे नेता को प्रदेश की काम देने पर विचार कर रही है.

इस संबंध में कांग्रेस नेता कालीचरण मुंडा ने कहा कि मैं कांग्रेस का सिपाही हूँ.पार्टी का जो भी आदेश होगा उसका मैं पालन करूंगा.उन्होंने कहा कि कांग्रेस से कई नेता अपनी निहित स्वार्थ में दूसरे दल में चले गये लेकिन मैंने आजतक कांग्रेस का दमन नहीं छोड़ा और न ही ऐसा कभी होगा. मैं यदि ऐसा पहले करता तो मैं माननीय होता.

खूंटी कांग्रेस के जिलाअध्यक्ष रामकृष्ण चौधरी ने कहा कि कालीचरण मुंडा एक सुलझे हुए व्यक्ति हैं और उनकी पकड़ पुरे झारखण्ड में है.ऐसे व्यक्ति यदि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बन जाते हैं तो निश्चित रूप से पार्टी का संगठन मजबूत होगा और आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का अधिक से अधिक विधायक होंगे.आने वाले दिनों में झारखण्ड में कांग्रेस नेतृत्व में सरकार बनेगी.उन्होंने कहा कि कालीचरण मुंडा के तमाड़ या तोरपा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की संभावना है. दोनों विधानसभा क्षेत्र से इनकी जीत तय है.वैसे चुनाव में अभी समय है और पार्टी आलाकमान निर्णय करती है कि कौन-कहां से चुनाव लड़ेगा.

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