पलाश की खेती को बढ़ावा देने के विषय पर चतरा सांसद ने केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावडे़कर को सौंपा ज्ञापन

चतरा सांसद सुनील कुमार सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने  शुक्रवार को वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावडे़कर से मुलाक़ात कर चतरा क्षेत्र में  पर्यावरण संरक्षण एवं पलाश की खेती को बढावा देने के लिए एक ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिध मण्डल में कमलेश सिंह, राजेश पाल, ईश्वरी राम, विनोद कुमार और विकास पांडेय शामिल थे। मुलाकात के दौरान एशिया फेम कुन्दरी लाह बगान के निरीक्षण एवं सम्पूर्ण विकास के लिए पलामू आने का आग्रह किया गया। पर्यावरण संरक्षण के लिए पीपल, नीम, बरगद और तुलसी वृक्ष को बढ़ाने हेतु जागरूकता अभियान चलाने का आश्वासन भी दिया। साथ ही पर्यावरण को स्वच्छ रखने हेतु समुचित सहायक कदम उठाने सहित पर्यावरण को हो रहे नुकसान एवं बढ़ती हुई जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, थर्मल प्रदूषण, कम करने  पर जोर दिया जाएगा।

चतरा सांसद सुनील कुमार सिंह ने ज्ञापन में कहा कि लोक सभा क्षेत्र चतरा के पलामू जिले में लेस्लीगंज प्रखण्ड (नीलाम्बर -पीताम्बर नगर) के पास एशिया का सबसे बड़ा कुन्दरी लाह बगान है। इस बगान में पलाश के पौधे बहुतायत में लगाये जाते हैं। इनका व्यवसायिक एवं आयुर्वेदिक औषधि निर्माण में उपयोग होता है। इन पलाश के पौधों पर लाह के कीडों का संचरण किया जाता है। इससे सैंकडों महिलाओं एवं पुरूषों केा रोजगार मिलता है। रैयतों/ग्रामीणों के द्वारा दिए गए भूमि एवं गैरमंजुरवा भूमि पर लगे हुए पलाश वृक्षों को संग्रहित कर  कुन्दरी लाह बगान का निर्माण हुआ था। जिसके माध्यम से ग्रामीणों को रोजगार, चारागाह इत्यादि जीवनोपार्जन की सुविधा मिल सकें और पलायन को समाप्त किया जा सकें। इस क्षेत्र के ग्रामीण कई वर्षो से भूमि का उपयोग चारागाह एंव अपने जीवकोपार्जन हेतु लाह उत्पादन एवं अन्य विभिन्न कार्य हेतु करते रहे हैं। 

  वन विभाग के पदाधिकारी मनमानी करते हैं तथा निर्माण कार्य आदि में भ्रष्टाचार की भी शिकायतें हैं। वन विभाग के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। ग्रामीणों ने बकाया मजदूरी भुगतान के लिए आत्मदाह करने की कोशिश की है। वन अधिकारियों ने झूठा आरोप लगाकर ग्रामीणों एवं मजदूरों पर केस भी दर्ज करा दिया गया। 

स्थानीय स्तर पर रिद्धी-सिद्धी प्राथमिक लाह उत्पादक सहयोग समिति बनी हुई है। इसके माध्यम से ग्रामीण आन्दोलित हो रहे हैं। ग्रामीणों की सरकार से मांग है कि अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 के तहत सामुदायिक अधिकार पट्टा के अंतर्गत वन संसाधन, संवर्धन और प्रबंधन करने का अधिकार पट्टा सुनिश्चित किया जायें। जिससे ग्रामीण स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनें और आजीविका के लिए पलायन की समस्या का समाधान हो सकें।

  ध्यान आकृष्ट कराते हुये कहना है कि झारखण्ड, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र जैसे दर्जनों राज्यों में पलाश वृक्ष भरे पडे़ है, लेकिन व्यवस्था के अभाव में लाख उत्पादन नहीं हो पा रहा है। 

  इसके अलावा श्री कमलेश कुमार सिंह, ग्राम$पोस्ट कुंदरी, प्रखण्ड – लेस्लीगंज पलामू – 822118 झारखण्ड ने एक कमद हरियाली की ओर अभियान के माध्यम से पलाश यात्रा शुरू की थी, जो दिनांक 01/06/2019 पलामू से पैदल दिल्ली 24/06/2019 को समाप्त हुई है। इस यात्रा के माध्यम से इन्होनें ने भी लाह/लाख की खेती को लघुवन पदार्थ से हटाकर कृषि वन उपज घोषित करने की मांग की है। 

  संासद श्री सिंह ने यह मामला गत 16वीं लोक सभा में भी दिनांक 27.12.2018 को नियम 377 के तहत उठाया गया था, परन्तु सरकार से इसका कोई जवाब नहीं मिला। 

  संासद सुनील सिंह ने भारत सरकार से आग्रह किया कि मंत्रालय स्तर से एक विशेषज्ञ समिति का गठन कर अध्ययन के लिए भेजा जाये और पलामू जिले के कुन्दरी लाह बगान के पूर्ण विकास से रंगिनी लाह बीहन केन्द्र के रूप स्थापित की जायें। यह क्षेत्र आर्थिक रूप से पिछडा क्षेत्र हैं। लाह के संग्रहण, संचरण व संवर्धन के कार्य से अधिक से अधिक लोगों का,े मुख्य रूप से किसानों को रोजगार मिल सकेगा। जिससे किसानों की आय बढाने में मदद मिलेगी। साथ ही सरकार द्वारा इस क्षेत्र पर किये गये व्यय की जंाच की जायें तथा प्रदेश स्तर से एक निगरानी तंत्र विकसित किया जायें। जिसके माध्यम से भ्रष्टाचार पर प्रभावी निषेध लगाया जा सके। 

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