नीलकंठ ने करायी रघुवर की बोलती बंद!

नीलकंठ ने करायी रघुवर की बोलती बंद!

गूंगे भी बोल उठे, जी हां रघुवर राज में फिलहाल ऐसा ही चल रहा है मुख्यमंत्री रघुवर दास ने जब से सत्ता संभाली उस वक्त से हर किसी की जुबां पर मानो ताला सा लग गया हो, सरयू राय के अलावा हर कोई खुद को बचाने में लगा था। सदन के अंदर हो सदन के बाहर हो, प्रोजेक्ट भवन हो या कोई भी बैठक रघुवर की आंखों के इशारे से विधायक और अधिकारियों की बोलती बंद हो जाती थी। हर विधायक खुद को परेशान और ठगा सा महसूस कर रहा था, उन्हें लगता था कि हम अपनी किसी बात को कहीं बोल नहीं सकते हैं सूत्रों की माने तो हालात यह हो गए थे कि विधायकों को बुलाकर धमकी भी दे दी जाती थी कि चुनाव लड़ना है या नहीं, इन सबके बीच सीएनटी और एसपीटी के मुद्दे ने BJP के विधायकों को एक मौका दे दिया और गूंगे विधायक बोल उठे, बोलना तो वह बहुत पहले से चाह रहे थे लेकिन हर किसी को डर था कि रघुराज में पहल करे तो कौन करें। इस बीच आदिवासियों के बीच राजनीति करने वाले राजनेताओं को लगा कि अभी ना बोले तो आने वाले समय में सदन के अंदर बैठने वाला आसन कहीं हम लोगों से छूट ना जाए। शायद यही वजह है कि गूंगे विधायक भी बोल उठे टीएसी की बैठक से 3 दिन पहले 8 विधायकों ने लगातार बैठक की बैठकों का दौर ऐसा कि सभी आर-पार के मूड में थे। कभी बैठक मेनका सरदार के घर में हुआ तो कभी लक्ष्मण टुडु तो कभी किसी और के घर रणनीति बनी। मनसा बस एक थी इस बार हमें बोलना है इस रणनीति की चिंगारी की शुरुआत बैठक से 3 दिन पहले बीजेपी विधायक ताला मरांडी के पत्र ने दी जो उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम लिखा था। लेकिन इन सबके बीच सवाल सबसे बड़ा था बैठक में कौन बोलेगा, क्या बोलेगा, कैसे बोलेगा ,और जो विधायक हैं वह क्या करेंगे यह सब पहले ही एक फिल्मी पटकथा की तरह लिख दिया गया था पहले से यह तय था कि मुख्यमंत्री की किसी बात को सुनना नहीं है अधिकारियों की बातें भी पहले से ही तय थी। फिल्म की तरह ही मोर्चा शिवशंकर उरांव और ताला मरांडी ने खोला और उसने सभी विधायक शामिल रहे आवाज एक जोरदार तरीके से उठाई गई जिसकी आवाज की भनक मुख्यमंत्री रघुवर दास को भी कमोबेश लग सी गई थी यही वजह रही की बैठक से ठीक 5 मिनट पहले मुख्यमंत्री ने शिवशंकर उरांव को अपने चेंबर में बुलाया जहां मुख्यमंत्री ने उनसे कुछ बातें करनी चाहि लेकिन शिव तो मानो अमृत पीकर ही आए थे और उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा मुख्यमंत्री जी अब जमीर जवाब दे गया है। इसके बाद मुख्यमंत्री को भी समझ में आ गया था कि आज क्या होने वाला है शिवशंकर मिनट भर में टीएसी की बैठक में पहुंच गए। मुख्यमंत्री जैसे ही बैठक में पहुंचे शिव ने ताल ठोका, ताला ने दी चुनौती लक्ष्मण ने तरकस में तीर लगाई जिसके साथ हो गए मेनका विमला। वक्त था और नजाकत भी विधायकों ने एक मैसेज अधिकारियों के सामने ही दे डाला कि अब हम बोल सकते हैं गूंगे नहीं है यही वजह रही की ढाई साल में पहली बार मुख्यमंत्री रघुवर दास भी प्रेस को संबोधित करते हुए थोड़े शांत से दिखे। हम मीडिया वालों को लगा कि आज पहली बार रघुवर अपने जैसे लग रहे हैं टीएसी के पहले जो बैठक हुई उसमें शामिल विधायकों में शिवशंकर उरांव, ताला मरांडी, लक्ष्मण टुडु, हरे कृष्णा सिंह, मेनका सरदार, विमला प्रधान, रामकुमार पाहन के साथ राज्य के गांव के विकास करने वाले एक मंत्री जी भी शामिल रहे। टीएसी के बैठक के तुरंत बाद सभी विधायक एक बार फिर आगे की रणनीति बनाने के लिए मंत्री जी के आवास पहुंचे। धीरे-धीरे जानकार सूत्र बता रहे हैं की विधायकों की इस बोलती फिल्म से प्रेरित होकर और भी विधायक आने वाले दिनों में अपनी आवाज बुलंद कर सकते हैं ऐसे में समय है रघु के लिए कि वह थोड़ा सा संयमित होकर अपनी रणनीति को तय करें जिससे अपने कुल को बचाने में उन्हें कामयाबी मिल सके। क्योंकि बचपन से ही हम सभी ने पढ़ा है कि अगर एक लकड़ी को तोड़ना हो तो वह बड़ी ही आसानी से टूट जाती है लेकिन कई लकड़ियों का गट्ठर बन जाए तो उसे तोड़ना नामुमकिन सा होता है यानी एकता में जहां एक तरफ बल है वही क्रोध विनाश की ओर ले जाता है।

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