नीतीश छवि बचाएं या सरकार?

-क्या नीतीश लेंगे बड़ा फैसला?
-लालू ने कल तो नीतीश ने एक दिन बाद बुलाई सभी पार्टी नेताओं की बैठक

बड़ा सवाल यही है कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात कहने वाले नीतीश कुमार तेजस्वी के मामले में क्या करेंगे. क्या जिस तरह अब तक वो ऐसे मामलों में अपने मंत्रियों पर कार्रवाई करते रहे हैं वैसे ही तेजस्वी को भी बर्खास्त करेंगे.ये सवाल सबके मन में है.आरजेडी नेताओं के इन तेवरों की वजह है नीतीश कुमार की सियासी मजबूरी. नीतीश कुमार कुर्सी पर इसीलिए हैं क्योंकि आरजेडी के 80 विधायक उन्हें समर्थन दे रहे हैं. ऐसे में तेजस्वी पर कार्रवाई करने का मतलब है आरजेडी की समर्थन वापसी का खतरा. अगर ऐसा हुआ तो नीतीश को अपनी सरकार बचाने के लिए बीजेपी का सहारा लेना पड़ेगा यानी अब नीतीश की सबसे बड़ी मुश्किल यही है कि वो अपनी सुशासन बाबू की छवि बचाएं या सरकार ?

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर सीबीआई छापों के बाद महागठबंधन में मानो भूचाल आ गया है. जदयू, आरजेडी से लेकर कांग्रेस तक में खलबली मची हुई है कि आखिर नीतीश कुमार उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के भविष्य पर क्या फैसला लेते हैं जिनके खिलाफ सीबीआई ने बेनामी संपत्ति अर्जित करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज कर कार्यवाई शुरू कर दी है.

ऐसे में आरजेडी और जेडीयू में अब बैठकों का दौर शुरू हो गया है और आगे की रणनीति पर विचार किया जा रहा है. सबसे पहले 10 जुलाई सोमवार की सुबह 10 बजे आरजेडी सुप्रीमो ने अपने आवास पर पार्टी के विधायक दल की बैठक बुलाई है. माना जा रहा है कि इस बैठक में लालू अपने छोटे बेटे और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं.
दूसरी ओर नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी जेडीयू की बड़ी बैठक राजद की मीटिंग के ठीक अगले दिन बैठक बुलाई है. इस बैठक में राज्य कार्यकारिणी, सभी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष इस बैठक में शामिल होंगे. नीतीश के सरकारी आवास एक अणे मार्ग में 11 जुलाई यानी मंगलवार को ये बैठक बुलाई गई है. जेडीयू की बैठक में महागठबंधन को लेकर आगे की रणनीति पर विचार होगा.

गौरतलब है कि आरजेडी विधायक दल के नेता इस वक्त तेजस्वी यादव हैं और उनके ही खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला चल रहा है और ऐसे में महागठबंधन सरकार को बचाने के लिए लालू के ऊपर इस बात का दबाव बनाया जा रहा है कि वह खुद तेजस्वी यादव को अपना इस्तीफा देने को कहें जिसके बाद विरोधियों को भी चुप किया जा सकेगा और महा गठबंधन सरकार भी सुचारु रुप से चलती रहे.

अगर लालू तेजस्वी का इस्तीफा करवाते हैं तो ऐसे में अगला उप मुख्यमंत्री कौन होगा इसको लेकर भी नामों का कयास लगाया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक लालू अपने बड़े बेटे और स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव को उप मुख्यमंत्री बना सकते हैं या फिर सरकार में आरजेडी कोटे से वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है.

जाहिर सी बात है लालू प्रसाद के कुनबे पर सीबीआई छापों के बाद महा गठबंधन सरकार इस वक्त संकट के दौर से गुजर रही है और ऐसे में मुख्यमंत्री को फैसला लेना है कि वह तेजस्वी यादव को अपने मंत्रिमंडल से कब और कैसे हटाते हैं ताकि सरकार चलती रहे. दूसरी ओर बीजेपी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव को हटाने के लिए लगातार दबाव बनाए हुए है.

दिलचस्प ये है कि महागठबंधन की तीसरी पार्टी कांग्रेस लालू यादव और उनके परिवार के सदस्यों के खुले समर्थन में है. सूत्रों के मुताबिक 17 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनावों को देखते हुए राजद के विधायकों और सांसदों की जरूरत कांग्रेस को है. इसलिए कांग्रेस खुलकर राजद का समर्थन कर रही है. राष्ट्रपति चुनाव के बाद ही पता चलेगा कि लालू और कांग्रेस और कितना करीब आते हैं.

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