नीतीश कुमार की टीम में मिथिलांचल को दिया गया अधिक महत्व

बिहार में नीतीश मंत्रीमंडल में इसबार मिथिलांचल को अधिक महत्व दिया गया है.फुलपरास की नवनिर्वाचित विधायक शीला कुमारी की राजनीतिक किस्मत चंद दिनों के भीतर ऐसी चमकी की मिसाल बन गई। शीला कुमारी पहली बार विधान सभा की चुनाव लड़ी और कांग्रेस के दिग्गज एवं कद्दावर नेता कृपानाथ पाठक को 10 हजार 966 मतों के अंतर से पराजित करने में सफल रही। इतना ही नहीं, पहली बार विधायक निर्वाचित होने के साथ ही इन्हें बिहार मंत्रिमंडल में भी स्थान मिल गया। शीला कुमारी जदयू उम्मीदवार के रुप में फुलपरास विधान सभा क्षेत्र से निर्वाचित हुई हैं। गौरतलब है कि 42 वर्षों के बाद फुलपरास के विधायक को मंत्रिमंडल में स्थान मिला है। इससे इस विधान सभा क्षेत्र के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है। शीला कुमारी को मंत्री बनाना किसी अचरज से कम नहीं है।

यह चौंकाने वाला निर्णय है। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि पहली बार विधायक बनने के बाद ही इन्हें मंत्रिमंडल में भी शामिल किया जा सकता है। 15 दिसंबर 1970 को मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे नवनिर्वाचित विधायक की शैक्षणिक योग्यता गृह विज्ञान से एमए है। नवनिर्वाचित विधायक के पति इंजीनियर है। स्वत्रंत भारत मे बिहार विधानसभा चुनाव 1952 से लेकर विधानसभा चुनाव 2020 तक में किसी प्रत्याशी के तौर पर सबसे अधिक मत प्राप्त करने का रिकॉर्ड भी शीला कुमारी के नाम हुआ। शीला कुमारी 2017 में अम्बेदकर दलित साहित्य अकादमी नई दिल्ली के द्वारा सावित्री बाई फूले राष्ट्रीय पुरस्कार एवं वर्ष 2018 में धनिकलाल मंडल फाउंडेशन की ओर से सशक्त नारी अवार्ड से सम्मानित हो चूकी है

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