ना ना करते कैसे हुआ आजसू- भाजपा गठबंधन

झारखंड में लगातार भाजपा पर हमलावर रही आजसू का लोकसभा चुनावों में भाजपा के साथ गठबंधन कैसे हो गया! भाजपा लगातार जीत रही गिरिडीह सीट आजसू को देने पर कैसे सहमत हो गयी ! भाजपा सांसद रविन्द्र पांडे अब क्या करेंगे! क्या लोकसभा में भी यही 13 – 1 का फार्मूला इन दोनों पार्टियों पर लागू होगा! यानि 81 विधानसभा में हमेशा की तरह आजसू को 6 या 7 सीटों से ही संतोष करना पड़ेगा! ऐसे कई सवाल हैं जो झारखंड की राजनीति को गरमाए हुए हैं. माना जा रहा है कि पिछड़े वोटों की गोलबंदी और वर्तमान भाजपा सांसद रविन्द्र पांडे तथा बाघमारा विधायक ढूल्लू

महतो के विवाद पर प्रदेश ने केंद्र को रिपोर्ट भेजी थी , जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक में शुक्रवार को झारखंड में ऑल झारखंड स्टुडेंट यूनियन (आजसू) के साथ चुनावी गठबंधन पर मुहर लगाई गई. इस समझौते के तहत बीजेपी झारखंड के 14 में से 13 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और आजसू गिरिडीह सीट से चुनाव लड़ेगी. आजसू ने कुछ ही दिनों पहले गिरिडीह से हर हाल में लोकसभा चुनाव लड़ने का एलान किया था. उम्मीद की जा रही थी कि आजसू एनडीए से रांची लोकसभा सीट भी मांग सकती है. पिछली बार आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो रांची लोकसभा से चुनाव लड़ चुके हैं. तब लोकसभा चुनाव में भाजपा –आजसू गठबंधन नहीं था और मोदी लहर के बावजूद सुदेश महतो को अच्छी संख्या में वोट मिले थे. वह तीसरे स्थान पर रहे थे.

आजसू के साथ पहली बार लोकसभा में गठबंधन होने के बाद  भाजपा महासचिव भूपेंद्र यादव ने कहा है कि एनडीए गठबंधन झारखंड की सभी सीटों पर जीत हासिल करेगा. झारखंड में आजसू एनडीए में शामिल है, लेकिन 2014 का लोकसभा चुनाव और झारखंड विधानसभा चुनाव दोनों दलों ने अलग-अलग लड़ा था. विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद आजसू ने एनडीए में शामिल होने का फैसला किया था.

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