दिसम्बर में नीतीश सरकार की नींद उड़ाने अन्ना आ रहे बिहार

जन लोकपाल की बहाली और वृद्ध किसानों को 5000 पेंशन देने के लिए होगा अनशन और सत्याग्रह

वरिष्ठ गांधीवादी विचारक अन्ना हजारे बिहार में सामाजिक बदलाव की सत्याग्रही पटकथा लिखने आ रहे हैं. दिसम्बर में पटना में उनका कार्यक्रम होगा. अपने बिहार दौरे के क्रम में अन्ना हजारे कई मसलों पर नीतीश सरकार को झकझोरेंगे. जन लोकपाल की नियुक्ति पर खामोश बैठे राज्य सरकार को उनका वायदा याद दिलाने और बिहार के 60 वर्ष से ऊपर के किसानों के लिए 5000 का मासिक पेंशन शुरू कराने जैसे कई महत्वपूर्ण मसले पर वो सरकार की नींद तोड़ेंगे| अगर नीतीश सरकार ने हठधर्मिता दिखाई तो अन्ना आमरण अनशन पर भी बैठ सकते हैं.
अन्ना आन्दोलन के बिहार प्रभारी संजय सिसोदिया बताते हैं कि जन लोकपाल के वायदे पुरे नहीं किये जाने से नाराज़ अन्ना हजारे ने इस विषय पर एक बार फिर सरकारों को सत्याग्रह के हथियार से परास्त करने का मन बना लिया है. सिसोदिया बताते हैं कि दिसम्बर में पटना के बाद अन्ना का फरबरी में दिल्ली प्रवास होगा |
2014 में यूपीए शासन के वक़्त जब दिल्ली में अन्ना का आमरण अनशन हुआ था तो भाजपा नेताओं ने देश के सामने यह सार्वजनिक रूप से कहा था कि सत्ता में आते ही वो जन लोकपाल विधेयक लागु करेंगे और लोकपाल की बहाली करेंगे. सत्ता के तीन साल बीत जाने के बाद भी न तो मोदी सरकार ने इस वायदे को पूरा किया, न ही बिहार की नीतीश सरकार या झारखंड की रघुवर सरकार ने | अन्ना भाजपा की इस वादाखिलाफी से बेहद क्षुब्ध हैं|

बकौल सिसोदिया, केंद्र सरकार यह तर्क दे रही है कि नेता प्रतिपक्ष नहीं होने की वज़ह से लोकपाल की नियुक्ति नहीं हो पा रही है| अन्ना इसे दोहरा रवैय्या मानते हैं | अन्ना कहते हैं कि जब सीबीआई निदेशक या अन्य नियुक्तियां बिना नेता प्रतिपक्ष के हो रही हैं तो लोकपाल के मामले में सरकार का यह दोहरा मापदंड क्यों! अन्ना और उनकी टीम मानती है कि सत्ता का विकेंद्रीकरण नहीं करने और पारदर्शी शासन व्यवस्था नहीं बनाने की कोशिश में भाजपा और कई राज्य सरकारें लगी हुई हैं | इसलिए इसबार निर्णायक सत्याग्रह होगा |

जब अन्ना का दिल्ली में आमरण अनशन चल रहा था, तब नीतीश कुमार ने भी लोकपाल की नियुक्ति का समर्थन किया था. लेकिन बिहार में इस दिशा में कभी कोई प्रयास नहीं हुए. सिसोदिया कहते हैं कि बिहार के वृद्ध किसानों की माली हालत बेहद खराब है. खेती से दो वक़्त की सम्मान की रोटी भी उन्हें नहीं मिल पाती. इस उम्र में वो खेतों में काम भी नहीं कर सकते. ऐसे में क्या जीवनभर खेतों में लगे रहे अन्नदाताओं को मरने के लिए छोड़ देगी सरकार. अन्ना इस गंभीर विषय को उठाने बिहार आ रहे हैं, जहाँ वो हजारों किसानों, नौजवानों और समाजसेवियों से चर्चा भी करेंगे.

अन्ना के बिहार आन्दोलन को सफल बनाने के लिए सिसोदिया ने पुरे राज्य में अभियान शुरू कर दिया है. सिसोदिया कहते हैं कि कार्यक्रम के लिए एक कमिटी का गठन हुआ है, जिसमे पूर्व आईएएस अधिकारी रामउपदेश सिंह, पंचमलाल,प्रख्यात चिकित्सक डॉ दिवाकर तेज़स्वी, डॉ उमाकांत पाठक, डॉ शैलेन्द्र मिश्र, शिक्षाविद अमरदीप गौतम, समाजसेविका पूनम बिन्द, मोनू सिंह लोकगायक छैला बिहारी आदि शामिल हैं. इसके अलावा अनशन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए हर दल के किसान प्रकोष्ठों से भी बात की जा रही है.

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