झारखंड में सभी 13 सीटों पर कठिन संघर्ष में भाजपा………

झारखण्ड में सभी 13 सीटों पर भाजपा कठिन संघर्ष में दिख रही है. गठबंधन में महीनों हुई खिच खिच के वक़्त एनडीए का ग्राफ तेज़ी से बढ़ रहा था, लेकिन जैसे जैसे गठबंधन ने अपने उम्मीदवार उतारने शुरू किये, महागठबंधन का ग्राफ चढ़ने लगा. आज की ताज़ा सियासी स्थिति यह है कि 2-4 सीटों को छोड़कर हर जगह एनडीए कठिन लड़ाई में है. यह बात अब एनडीए के नेता स्वीकार भी रहे हैं. ऐसा हुआ क्यों ! यह समझने के लिए हमें हर लोकसभा के सामाजिक समीकरण और दोनों ही प्रमुख गठबन्धनों के उम्मीदवारों की स्वीकार्यता समझनी होगी साथ ही यह भी समझना होगा कि खुद कई दलों ने कमजोर उम्मीदवारों को उतारकर कैसे लड़ाई को कमजोर कर दिया है.

सबसे पहले रांची लोकसभा क्षेत्र की बात. गठबंधन की ओर से कांग्रेस उम्मीदवार सुबोधकांत सहाय तक़रीबन एक महीने से सक्रिय रूप से अपना प्रचार प्रसार शुरू कर चुके थे, जबकि भाजपा में हर दिन नए नए उम्मीदवारों के नाम के किस्से सुनाई पड़ रहे थे. पार्टी ने रामटहल चौधरी का टिकट काटकर उन्हें मनाने की बजाय बागी बनने दिया. इस धाकड़ कुर्मी नेता को लग रहा था कि मुख्यमंत्री रघुवर दास उनके विरोध में हैं और सीएम के करीबी संजय सेठ को टिकट मिलने से इस बात की पुष्टि भी हो गई. इससे रामटहल बिदक गए और कुर्मी वोटरों के बीच उन्होंने इसे समाज के अपमान का मुद्दा बनाने की कोशिश की. भाजपा के लिए जो सीट सबसे आसान दिख रही थी, वो मुश्किल दिखने लगी.

रांची से सटे खूंटी सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा भी मुश्किल संघर्ष में दिख रहे हैं. मुंडा के खिलाफ कांग्रेस के कालीचरण मुंडा हैं, जो झारखंड सरकार के मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा के भाई हैं. स्थानीय बनाम बाहरी के सवाल से अर्जुन मुंडा पर सियासी वार किये जा रहे हैं. कई भाजपा पदाधिकारी भी पर्दे के पीछे से अर्जुन के रथ को रोकने की कोशिश में हैं. जबकि कालीचरण मुंडा की निर्विवाद और मिलनसार छवि उन्हें लड़ाई के केंद्र में ले आयी है.

लोहरदगा सीट पर फिर से भाजपा ने सुदर्शन भगत को मैदान में उतारा है. सुदर्शन भगत के बारे में कहा जाता है कि चमरा लिंडा इन्हें जिता देते थे. इस बार चमरा मैदान में नहीं हैं.   

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