झारखंड में विपक्षी नेताओं के विचार तो एक,लेकिन मंजिल पाने के लिए रास्ते अलग- अलग

झारखंड में विधानसभा चुनाव को लेकर विपक्ष एक बार फिर से महागठबंधन को प्रारूप देने की कवायद में जुट गई है. भाजपा जहां 65प्लस मिशन में लगी हुई है.वहीँ झामुमो बदलाव यात्रा के माध्यम से भाजपा सरकार को उखाड़ फेकने के लिए जनता को गोलबंद करने में जुट गया है.पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हेमन्त सोरेन अपने से सभी 81 विधानसभा क्षेत्रों में बदलाव यात्रा का आयोजन कर जनता का नब्ज टटोलने में लगे हुए हैं.हालांकि बदलाव यात्रा का 19 अक्टूबर को राजधानी रांची में समापन हो जायेगा. इस बीच झामुमो के नेता इसबार विधानसभा चुनाव में अपनी जीत के प्रति पूरी तरह से अस्वस्थ दिख रहे हैं और सरकार बनाने की भी दावा कर रहे हैं.पार्टी के केन्द्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य की मानें तो झारखंड की जनता पांच सालों में भाजपा की सरकार से तंग हो चुकी है. जिस उम्मीद से जनता से अपना आशीर्वाद दिया था,सरकार उसपर खरी नहीं उतर पाई है. जनता बदलाव के मुड में पूरी तरह से तैयार है.

वहीँ कांग्रेस के झारखंड प्रभारी आरपीएन सिंह ने अपने झारखंड दौरे पर स्पष्ठ रूप से कहा है कि इसबार सत्ता परिवर्तन तय माना जा रहा है. जनता रघुवर सरकार से परेशान हो चुकी है. उन्होंने कहा कि 5 सालों में रघुवर सरकार का जो शासन काल रहा है उसे जनता जान रही है. रघुवर सरकार सिर्फ वादे कर रही है. हमारी प्रतिज्ञा है कि रघुवर दास सरकार को उखाड़ फेंकेगे. यही हाल कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का भी है महागठबंधन के सवाल पर वह तो होगा..होगा..होगा कहते हैं लेकिन नेता के नाम पर खामोश हो जाते हैं.

महागठबंधन में फ़िलहाल कांग्रेस के साथ राजद ही दिख रहा है.झामुमो और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग फिलहाल फ़ाइनल मोड पर नहीं पहुंच पाई है. साथ ही हेमंत को महागठबंधन का नेता मानने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं.

वहीँ राजनीतिक जानकारों की मानें तो इसबार विधानसभा चुनाव में विपक्षी दल अलग मैदान में उतरेंगे.चुनाव परिणाम के मुताबिक नेतृत्व की बातचीत होगी. जिस पार्टी की अधिक सीटें होगी,सीएम उसी दल का होगा. 2009 में भी झारखंड में इसी तरह से कांग्रेस,राजद,झाविमो और झामुमो ने चुनाव लड़ा था. बीजेपी गठबंधन को इन चुनावों में 20 सीटों से संतोष करना पड़ा है. हालांकि इससे पहले चुनावों में बीजेपी गठबंधन को 36 सीटें मिली थीं. 20 में से 18 सीटें बीजेपी को मिली थी, जबकि जेडी यू को दो सीटें मिली थी. राष्ट्रीय जनता दल को पांच सीटें मिली थी, जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा को 18 सीटें मिली थी.उस समय झामुमो ने भाजपा से साथ मिलकर सरकार बनाई थी.हालांकि वह सरकार एक साल ही चली.

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