झारखंड के असली चौकीदारों को नहीं मिला है चार महीने से वेतन

पूरे देश में अपनी चौकीदार शब्द पर प्रतीकात्मक घमासान है. सत्ता पक्ष कहता है मैं हूं चौकीदार तो विपक्ष का नारा है चौकीदार चोर है. ऐसे में सियासी चौकीदारों के उलट हमने झारखंड के असली चौकीदारों की स्थिति और उनकी राजनीतिक मनोदशा समझने की कोशिश की. इसके लिए हमने दो किस्म के चौकीदारों को चुना. पहले हमारी टीम ने रांची में एक निजी बैंक के एटीएम के बाहर ड्यूटी दे रहे एक सुरक्षा एजेंसी के चौकीदार जीतेंद्र से पूछा कि आप चौकीदार शब्द पर मचे घमासान के बारे में क्या सोचते हैं! इनका जवाब बड़ा कमाल का था. जीतेंद्र ने कहा कि एजेंसी की ओर से हमलोगों को 8500 रुपया वेतन मिलता है. हमेशा चौकस रहना हमारी मजबूरी है. इस महंगाई में जैसे तैसे परिवार का पेट भरने वाले हमलोगों को इस सियासी नाटक से क्या लेना देना!
ऐसे ही हमने प्रदेश के थानों से जुड़े चौकीदारों की हालत समझने के लिए संथाल परगना के नक्सल प्रभावित रामपुर गांव का रुख किया यहां काफी ढूँढने पर मिले वंशीलाल मिर्धा. कई दशकों से चौकीदारी कर रहे वंशीलाल के घर की छत तक महफूज नहीं है. पिछले 4 महीने से इस असली चौकीदार को वेतन नहीं मिला है. इसके परिवार की होली बेरंग रही. कई साल पहले इन चौकीदारों को रात में काम करने की सुविधा के लिए टोर्च और लाठी मिलती थी. अब सब बंद है . ऐसे में यक्ष प्रश्न है कि यह चौकीदार कैसे ठीक से चौकीदारी करे !
एक ढहते कच्चे घर, कई महीनों से वेतन के लाले, उसपर से नक्सली खतरे का सामना यह चौकीदार वाला कैसे करे! चौकीदार शब्द को राजनीतिक तमाशे का हिस्सा बना देने वाले नेताओं को असली चौकीदारों की स्थिति इन गांवों में आकर देखनी चाहिए. इसी गांव के माली मुर्मू कहते हैं कि सब नेता लोग झूठ झूठ का चौकीदार का नारा लगा रहा है. कोई सच नहीं जानना समझना चाहता. चौकीदारी का काम बेहद जिम्मेवारी का है, नेताओं का क्या ! वह आज कुछ तो कल कुछ और बोल देंगे. बोलने के अलावा इन नेताओं के पास और क्या काम है! वह हम से ही पूछते हैं.
दरअसल इन असली चौकीदारों को मालूम ही नहीं है कि उनके नाम और काम पर देश में कैसा छद्म युद्ध छेड़ा गया है. इन्हें तो इस दलदल से दूर ही रखिये. राजनीति के छल कपट से दूर इनकी दुनिया रात के सन्नाटे से लेकर दिन के उजाले में •ाी बस निगहबानी में ही बीतती है.

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *