जन विरोधी सरकार को हर हाल में है भगाना : दयामनी बारला

जनआंदोलन की संयुक्त मोर्चा की संयोजक दयामनी बारला ने कहा कि लोकसभा चुनाव में किसी भी कीमत पर जन विरोधी सरकार को रोकना है.वे बुधवार को रांची प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहीं थीं. उन्होंने कहा कि 2014 में हमने 16वीं लोकसभा चुनाव देखे.चुनाव के समय भाजपा का लोक लुभावने वादे भी देखे. भाजपा ने चुनाव प्रचार में जनता से आच्छे दिन लायेंगे,विदेश से काला धन वापस लायेंगे,सभी गरीबों के खाते में 15-15 लाख रूपये भेजा जायेगा,सलाना 2 करोड़ नौकरी देगी,मांहगाई पर रोक लगाना प्रमुख रूप से जनता से वादा किया था.लेकिन इनमे से एक वादा भी भाजपा ने नहीं पूरा किया है.जनता को पूरे पांच सालों तो मुर्ख बनाते रहे. यहीं नहीं भाजपा का नारा सबका साथ सबका विकास भी झूठा साबित हुआ है.चार साल भीतर अच्छे दिन की सरकार ने राज्य और देश की आम जनता पर चारों तरफ से हमला किया.जैसे नोटबंदी से परेशानी,डिग्रीधारियों से पौकोड़ा बेचवाना,कौशल विकास और रोजगार के नाम पर 6000-8000 वेतन पर युवाओं को राज्य से बाहर भेजने से परेशानी,गोमाता जे नाम पर दलितों-अल्पसंख्यकों और आदिवासियों पर अत्याचार,भूमि बैंक सहित कई अन्य जन विरोधी कानून बनाकर लोगों को प्रेषण करना,बन्धुक की नोक पर जंगल,जमीन-पानी लूट कर कार्पोरेट को देना,पत्थलगडी के नाम पर हातू मुंडा सहित 17 हाजार आम नागरिकों पर साजिस के तहत केस कर जेल भेजना सहित कई मामले जन विरोधी साबित हुई है.इससे झारखण्ड की जनता परेशान रही. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में न तो भारत का संविधान सुरक्षित है न ही देश और राज्य का लोकतंत्र सुरक्षित है.ऐसे संकट के समय में हम जन आंदोलनों की संयुक्त मोर्चा ने निर्णय लिया है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराना है.

श्रीमती बारला ने कहा कि हमारे संगठन ने महागठबंधन को शर्तों पर समर्थन करने का फैसला लिया है.जिसमे पांचवीं अनुसूची में ग्रामसभा को अधिकार दिया गया है,उसे लागू करवाना, पत्थलगड़ी गांव के ग्रामीणों के ऊपर मामले को समाप्त करवाना,ग्रामसभा को शिक्षा का दायित्व देना होगा,वनाधिकार अधिनियम 2006 के तहत वनोत्पाद में ग्रमीणों के अधिकार को पूर्ण रूप से लागू कराना तथा सभी आदिवासी मूलवासियों को जिनका वन पट्टा रद किया गया है,अविलंब उनको वन पट्टा दिलवाना,साथ ही नए आवेदनों को स्वीकृत करवाना। खनन कार्य,ठेकेदारी सभी मे 80 फीसद होस्सेदारी स्थानीय ग्रामीणों को दिलवाना है.        

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