जनविरोधी नीतियों के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगीः सुबोधकांत

सरकार राज्य की आम जनता के साथ अन्याय कर रही है। रघुवर दास की नीतियों से लोग कराह रहे हैं। जनविरोधी, गरीब और किसान विरोधी इस सरकार के कारगुजारियों से जनता अब उब चुकी है। पुंजीपतियों के हित के लिए सीएनटी/एसपीटी एक्ट में छेड़छाड़ किया गया। इसको लेकर राज्य सरकार ने भारी जनविरोध के बावजूद भूमि संशोधन बिल पारित किया। जिसे गृह मंत्रालय ने पुनर्विचार के लिए लौटा दिया है। भारत सरकार के कृषि मंत्रालय ने भी इसपर कड़ी टिप्पणी की है। उसी अनुशंसा के मद्देनजर गृह मंत्रालय ने यह कदम उठाया है। यह रघुवर दास सरकार के लिए एक सबक है। ये बातें कांग्रेस नेता औप पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कही।

उन्होंने राज्य सरकार पर हमला करते हुए कहा कि जल्द ही वह समय आने वाला है जब इस सरकार के लोग जेलों में होंगे। उन्होने मुख्यमंत्री रघुवर दास पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस राज्य में भू-माफिया, पूंजीपतियों और कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए नीतियां बनाई जा रही हैं। सरकार में शामिल लोग ठेकेदारी में हिस्सेदारी कर रहे हैं। कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए सीएनटी/एसपीटी एक्ट में नियम विरुद्ध संशोधन किया जा रहा था लेकिन लोगों को विरोध की वजह से सरकार को बैकफुट पर जाना पड़ा था। इसकी भरपाई और पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए ही रघुवर सरकार ने भूमि अधिग्रहण कानून संशोधन अधिनियम 2017 को विपक्ष के विरोध के बावजूद विधान सभा से आनन-फानन में पास करवा लिया था। 2013 में तत्कालीन यूपीए सरकार के द्वारा बनाये गए कानून की मूल आत्मा को ही परिवर्तित कर दिया गया था इस संशोधन बिल में सोशल इम्पैक्ट, ग्रामसभा की सहमति जैसे विषयों को गौण कर आदिवासियों, मूलवासियों के हितों एवं भारत सरकार की नीतियों के विपरीत यह बिल लाया गया है।

सरकार के ऐसे प्रयासों से यह स्पष्ट हो जाता है कि मुख्यमंत्री भू-माफिया एवं पूंजीपतियों के साथ मिलकर आदिवासियों और मूलवासियों की जमीन लुटवाना चाहते हैं। इसकी ज्युडिशियल इंक्वाइरी होनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी ने इन मुद्दों को लेकर क्षेत्रवार लंबी लड़ाई लड़ी है सिर्फ आदिवासियों, मूलवासियों को बेहतर मुआवजा एवं रोजगार मिले इसके लिए 8 वर्षों से लड़ाई जारी है अकेले बड़कागांव में 3 गोलीकांड हुए। यह लंबे संघर्ष का नतीजा है कि मुआवजा राशि को दो लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करना पड़ा। श्री सहाय ने कहा कि सरकार की मंशा देखिए कि भैरव जलाशय योजना में 90 रुपये दर से मुआवजा का प्रावधान रैयतों के लिए किया गया। मुआवजा ,विस्थापितों का पुनर्वास और स्थानीय लोगों को रोजगार सरकार की प्राथमिकता सूची में है ही नहीं। गोड्डा जिले में अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए यही कहानी दुहरायी गई। रैयतों के आंदोलन को दबाया गया, जन प्रतिनिधियों को टारगेट कर झूठे मुकदमे लादे गए। पूर्व मंत्री योगेन्द्र साव 2005 से ही इस लड़ाई को लड़ रहे हैं तब जाकर सरकार रैयतों को 2 लाख से 20 लाख रुपये मुआवजा देने पर सहमत हुई है। सरकार जब डीसी कार्यालय में ग्राम सभा का आयोजन करवाने लगे, ग्रामीणों को डरा धमका कर सहमति पत्र पर हस्ताक्षर ले, तो आप हालात का अंदाजा लगा सकते हैं। बड़कागांव में तकरीबन 1600 एकड़ भूमि अधिग्रहण होना है तीन-तीन बार गोलीकाण्ड को अंजाम दिया जाता है। तीनों बार यह घटना योगेन्द्र साव की गैरहाजिरी में हुई बावजूद इसके प्रशासन के द्वारा केस में इनके नाम को शामिल दिखाया जाता रहा है जो इस सरकार की गलत मंशा को दर्शाता है। यह घोर निंदनीय है।

वहीं निर्मला देवी को सत्याग्रह कार्यक्रम से जबरन गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। दोनों के ऊपर लगे सारे आरोप निराधार, झूठे और विद्वेष की राजनीति से किये गए हैं। यह प्रमाणित हो चुका है। सरकार ने बेल रिजेक्ट करवाने के लिए हर हथकंडे का सहारा लिया यहां तक कि पहली बार ऐसे केस में अटार्नी जनरल को पैरवी के लिए बहस करवाई । सुप्रीम कोर्ट से बेल मिलने पर राज्य में प्रवेश पर रोक लगवा कर भोपाल में रहने का आदेश होने पर रिहाई के पहले ही योगेन्द्र साव पर तीसरी बार सीसीए लगवाने की अनुशंसा करवा देना ये व्यक्तिगत विद्वेष नहीं तो और क्या है। सीएनटी/ एसपीटी एवं जमीन की लड़ाई में सरकार का बैकफुट पर जाना हमारे संघर्ष का ही परिणाम है। गैरमजरूआ जमीन की बंदोबस्ती रद्द कर वर्षों से रह रहे लोगों को नोटिस भेजना सरकार के अन्याय की पराकाष्ठा है। कहा कि वह समय जल्द ही आने वाले है जब सीएम का दिन जेल में कटेगा।

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