गांधीजी प्रेम के लिए खड़े रहे, नफरत के लिए नहीं : सोनिया गांधी

आज पूरा देश और दुनिया महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मना रहा है। इस मौके पर कांग्रेस पदयात्रा निकाल रही है। जिसे गांधी संदेश यात्रा का नाम दिया गया है। यह यात्रा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में निकाली जा रही है। जिसके लिए गांधी दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमिटी के कार्यालय पहुंच गए हैं।कांग्रेस मुख्यालय से राजघाट तक हजारों कार्यकर्ता सफेद कपड़े और सिर पर गांधी टोपी लगाकर पदयात्रा में शामिल हुए हैं। वहीं महासचिव प्रियंका गांधी के लखनऊ में पदयात्रा का नेतृत्व की।

पदयात्रा जब राजघाट पहुंची तो कांग्रेस की अतंरिम अध्यक्ष सोनिया ने कहा, ‘भारत की बुनियाद में गांधी के सिद्धांत है। कांग्रेस हमेशा गांधीजी के सिद्धांतों पर चली। जो पूर्ण सत्ता चाहते हैं वह गांधी को कभी समझ नहीं पाए। गांधीजी प्रेम के लिए खड़े रहे, नफरत के लिए नहीं। झूठ की राजनीति वाले गांधी को नहीं समझ सकते। आज देश में युवा बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं।’

राहुल गांधी ने बापू की 150वीं जयंती के मौके पर कहा कि राष्ट्रपिता ने दिखाया है कि कैसे सभी जीवित प्राणियों के लिए प्रेम और अहिंसा ही एकमात्र तरीका है जिससे हम कट्टरता और घृणा को परास्त कर सकते हैं। मंगलवार सुबह सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

राहुल गांधी ने ट्विटर पर लिखा, ‘महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर महात्मा गांधी जी को मेरी श्रद्धांजलि। राष्ट्रपिता जिन्होंने अपने शब्दों और कर्मों के जरिए हमें दिखाया कि सभी जीवित प्राणियों और अहिंसा के प्रति प्रेम ही उत्पीड़न, कट्टरता और घृणा को हराने का एकमात्र तरीका है।’

कांग्रेस की इस पदयात्रा पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने तंज कसा है। उन्होने कांग्रेसियों को राहुल गांधी की परिक्रमा करने की नसीहत दी है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ‘गांधी जी की जयंती पर कांग्रेस पद यात्रा कर रही है। कांग्रेस कार्यालय से राजघाट की बजाय राहुल गांधी की परिक्रमा कांग्रेसी कर लें, उनकी पद यात्रा पूरी हो जाएगी।’

आज से भाजपा ने गांधी संकल्प यात्रा शुरू कर दी है। इस यात्रा को गृहमंत्री अमित शाह ने हरी झंडी दिखाई। कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मैं देशभर के करोड़ों कार्यकर्ताओं को कहना चाहता हूं कि गांधी 150 हम सब के लिए संकल्प का वर्ष बने, गांधी 150 राष्ट्र को एक मुकाम आगे ले जाने का वर्ष बने।

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