एक बार फिर बंद आंखों से निशाना साधने में जुटे : अर्जुन

- प्रधानमंत्री से मुलाकात के कई मायने

झारखंड में इन दिनों लिट्टीपाड़ा विधानसभा उपचुनाव के परिणाम आने के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चा है. परिणाम के ठीक बाद अर्जुन मुंडा की प्रधानमंत्री से मुलाकात समझ से परे है. लेकिन इन सबके बीच जानकार बता रहे हैं यह मुलाकात झारखंड में सत्ता फेरबदल को लेकर नहीं था. बल्कि अर्जुन मुंडा का उत्साह बढ़ाने के लिए था. उड़ीसा में पिछले दिनों हुए पंचायत चुनाव के परिणाम से प्रधानमंत्री उत्साहित है. उत्साह की वजह है कि उड़ीसा में आदिवासियों की संख्या भी अच्छी खासी है जहां अर्जुन मुंडा का जादू चला और उस इलाके में उड़ीसा में पंचायत चुनाव में कामयाबी भी मिली.

लेकिन इसके बावजूद हाल के दिनों में अर्जुन मुंडा झारखंड में खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे. लिट्टीपाड़ा विधानसभा उपचुनाव के परिणाम आने के बाद केंद्रीय नेतृत्व को कहीं ना कहीं इस बात का इल्म जरूर हुआ कि झारखंड में यदि आदिवासियों की राजनीत करनी है तो अर्जुन मुंडा को दरकिनार कर के नहीं किया जा सकता है. ऐसे में मुंडा जी अपने धनबाद दौरे पर थे और अचानक केंद्र नेतृत्व का फरमान पहुंचा कि प्रधानमंत्री जी मुलाकात करना चाह रहे हैं. फिर क्या था अर्जुन मुंडा सारे कार्यक्रम को छोड़कर दिल्ली पहुंचे. जहां प्रधानमंत्री जी से लगभग 40 मिनट बाते हुई बात की मूल वजह थी कि आने वाले समय में उड़ीसा में होने वाला विधानसभा चुनाव जहां पार्टी अपनी दबिश बनाना चाह रही है और इसके लिए उन्होंने अर्जुन मुंडा से भीतर खाने में कहा है कि वह झारखंड से सटे हुए विधानसभा सीटों पर पूरी ताकत लगा दे. जिस से परिणाम बीजेपी के पक्ष में आए वही झारखंड में आदिवासियों के बीच कैसे अपनी पकड़ मजबूत बनाए जाए इसको लेकर भी बातें हुई.

जानकार बता रहे हैं की सत्ता परिवर्तन को लेकर कोई ऐसी बातें अर्जुन मुंडा से नहीं की गई है. हां इतना जरूर है की नरेंद्र मोदी के शासन में मुंडा कुनबा पूरी तरह से अलग थलग था. ऐसे में केंद्र नेतृत्व ने इस मुलाकात के सहारे रघु के कुनबे को एक मैसेज देने का भी काम किया है कि वह झारखंड में सियासत संभलकर करें. बातें तो सियासत बदलने की नहीं हुई लेकिन मुलाकात ने इशारों-इशारों में रघुवर दास को सचेत रहने का मैसेज जरूर दे डाला है. हालात यह हैं की चर्चा आम है कि अचानक जिस अर्जुन मुंडा को मोदी जी पूरी तरह भूल गए थे उन से 40 मिनट तक बातें की शायद इतना समय 1 दिन में अब तक रघुवर दास को भी मुलाकात करने का नहीं मिला होगा. नरेंद्र मोदी जी का ध्यान उड़ीसा के साथ आने वाले लोकसभा चुनाव में भी है क्योंकि 2014 मैं झारखंड में 14 लोकसभा सीटों में से 12 पर बीजेपी का कब्जा रहा है. जिसमें मुख्य भूमिका में उस वक्त अर्जुन मुंडा का ही कुनबा रहा था.

केंद्र नेतृत्व से मिलने के बाद अर्जुन मुंडा के अंदर एक ताकत जरूर आई है और उन्होंने अपनी चहल-पहल भी बढ़ा दी है. संघ कार्यालय जाकर संगठन के लोगों से मुलाकात करना साफ तौर से इशारा कर रहा है कि मुंडा जी एक बार फिर अपनी बंद आंखों से मछली पर निशाना साधने की तैयारी में जुट चुके हैं.

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