आपस में ही मुक्का भांज रहे हैं विपक्षी दल

झारखण्ड में राज्य सरकार के खिलाफ विरोधी दल के लोग अलग अलग तो खूब बोलते हैं पर जहाँ विपक्षी एकता की बात सामने आती है, वहां सबके सुर बदल जाते हैं विपक्षी एकता तार-तार है. नेता बिखरे पड़े हैं सभी एक दूसरे से आगे जाने की होड़ में लगे हैं. सत्ता पक्ष के लिए तो यह आदर्श स्थिति है. नीतेश मिश्र की रिपोर्ट…

एक बानगी देखिये….विधायक प्रदीप यादव फरमा रहे हैं कि प्रमुख विपक्षी पार्टी तो जेवीएम ही है जेवीएम ही जनता के मुद्दों को उठाने का काम कर रही है, चाहे सदन के अंदर की बात हो या बाहर की | प्रदीप यादव इतने पर ही नहीं रुकते, उन्होंने जेएमएम सहित कांग्रेस पर राजनीतिक हमला किया और कहा कि ये दल जनता के मुद्दों को सही से उठा नहीं पाते, जितने तरीके से जेवीएम उठा रही है.
अब दो विधायक वाले दल के इस दुस्साहस पर 18 विधायक वाला झारखण्ड मुक्ति मोर्चा कैसे चुप रहे! प्रदीप यादव के इस बयान को लेकर नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने पलटवार किया और कहा कि प्रदीप यादव हमें न सिखाएं. इतना ही दंभ था तो जनता ने ऐसी हैसियत क्यों कर दी. हेमंत ने कहा कि जनता ने हमें प्रमुख विपक्षी पार्टी होने का हक दिया है और सदन में सवाल कैसे उठाना है सदन के बाहर बातें कैसी करनी है, वह हमारी पार्टी अच्छी तरह से जानती है.
अब जब बात चल निकली तो भला कांग्रेस कैसे चुप रहती. कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम का सियासी ज्ञान सुनिये….. वो फरमाते हैं कि जेएमएम को प्रमुख विपक्षी होने का गौरव जनता ने दिया है. प्रदीप यादव संविधान को नहीं बदल सकते हैं. हां यह अलग बात है कि प्रदीप यादव भी अपनी बातों को गंभीरता से उठाते हैं.
भाजपा तो चाहेगी नहीं कि ये विरोधी सूरमा कभी एक हों इसलिए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा ने भी प्रदीप यादव की बातों पर सहमति जताई और कहा कि यह बात सही है कि हेमंत सोरेन सहित उनकी पार्टी मुद्दों को गंभीरता से नहीं उठाती है, जबकि जेवीएम विधायक मुद्दों को गंभीरता से उठाते हैं और उन्होंने यह भी कहा कि जेवीएम ही हमारी प्रमुख प्रतिद्वंदी है.
इसी बीच रघुवर दास ने कह दिया कि झारखण्ड अब मुक्त हो चुका है, इसलिए अब इस प्रदेश को झामुमो की जरुरत नहीं है. झामुमो ने इसका विरोध किया, पर अन्य दल खामोश रहे. सरकार पर नकेल कसने का काम विपक्ष करता है, लेकिन झारखंड में विपक्ष के कुनबे बिखरे पड़े हैं. जिसका फायदा सरकार आसानी से उठा रही है, शायद यही वजह है कि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भी बड़ी चतुराई से जेवीएम को ही अपना प्रमुख प्रतिद्वंदी मान रहे हैं. वैसे चुनावी समर तो अभी दूर है लेकिन इस समय से पहले सरकार को घेरने की बजाय खुद में इनका उलझना लोगो की समझ से परे है. कहीं पोडैयाहाट उपचुनाव की वजह से तो ऐसा नहीं हो रहा है.

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