असली-नकली के बीच पुतुल कुमारी का शोर बढ़ रहा

बांका में इस बार भी उसी तरह के हालात हैं, जैसे पहले के चुनाव के वक्त थे। यह सीट समाजवादी नेता दिग्विजय सिंह की रही है और इस बार भी वहां से उनकी पत्नी पुतुल सिंह बतौर निर्दलीय लड़ रही हैं। कहने को तो यहां से एनडीए और महागठबंधन के प्रत्याशी भी चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन मुकाबले में सबसे अव्वल पुतुल सिंह ही हैं। मुकाबला त्रिकोणीय कहा जा रहा है, पर यहां भी सभी की लड़ाई पुतुल सिंह से ही है। जदयू के प्रत्याशी विधायक गिरिधारी यादव हैं तो पुतुल कुमारी खुद को ‘एनडीए का असली कैंडिडेट’ बता रही हैं। दोनों ही पीएम मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं। महागठबंधन ने राजद प्रत्याशी और सांसद जयप्रकाश नारायण यादव पर ही फिर से भरोसा जताया है। तीनों ही प्रत्याशी बांका से जीत चुके हैं। 2014 में पुतुल कुमारी महज दस हजार वोटों के अंतर से ही जयप्रकाश नारायण यादव से हारी थीं, इसलिए इस बार यहां जंग बेहद रोचक है।

पिछले चुनाव में पुतुल कुमारी ने बतौर भाजपा उम्मीदवार चुनाव लड़ा था। इस बार यह सीट जदयू के खाते में चली गई है, इसलिए ऐसी नौबत आ गई है। जानकारी के मुताबिक यहां से पुतुल कुमारी को जब जदयू ने अपना कैंडिडेट नहीं बनाया तब जाकर उन्होंने भाजपा छोड़ दी और निर्दलीय लड़ने का फैसला लिया। उनका यहां कोर वोटर है, इसलिए किसी का भी मुकाबला पुतुल कुमारी से ही होगा। जयप्रकाश यादव भी ऐसा ही सोच रहे हैं। हालांकि, वे पूरा आत्मविश्वास दिखा रहे हैं, पर पिछले चुनाव में महज दस हजार वोटों से हुई जीत उनके भरोसे को मजबूती नहीं दे पाते हैं।

दूसरी ओर पुतुल कुमारी कहती हैं- लोगों में मेरे साथ जो हुआ है, उससे दुख है। मुझे ही सहज तौर पर एनडीए का प्रत्याशी माना जा रहा है, लोगों में किसी भी तरह का कोई भ्रम नहीं है। इसलिए मुझे ही असली एनडीए का प्रत्याशी मान रहे हैं। एक और चर्चा है कि जदयू ने उनकी पुत्री श्रेयसी सिंह को टिकिट का ऑफर दिया था, लेकिन इस पर कोई बात भी करना नहीं चाहता है। पुतुल कुमारी के भाषणों और लोगों से संवाद को सुनने पर यह एहसास हो जाता है कि जदयू प्रत्याशी के लिए यह लड़ाई कितनी कठिन है। पुतुल बार-बार सर्जिकल स्ट्राइक और नरेन्द्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यों के आधार पर वोट मांग रही हैं। मोदी को दुनिया का सबसे मजबूत नेता भी वे मानती हैं। उन्होंने उज्ज्वला चूल्हा शिविर लगा लगा कर बंटवाया था और गनीमत है कि उनका चुनाव चिह्न भी गैस सिलिंडर ही है। कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली अंतरराष्ट्रीय शूटर और अर्जुन पुरस्कार प्राप्त श्रेयसी सिंह पुतुल कुमारी की छोटी बेटी हैं और वह भी चुनाव प्रचार में जुटी हुई हैं। सबसे बड़ी बात उनके सिर पर दिवंगत दिग्विजय सिंह की विरासत है,  जो यहां के मतदाताओं पर भारी है। इस बात को उनके विरोधी भी मानते हैं। इन मसलों पर श्रेयसी कहती हैं- भाजपा का संगठन खड़ा करने में पुतुल कुमारी की बड़ी भूमिका है। इसे भाजपा भी जानती है और लोग भी। ऐसे में लोगों को असली और नकली के बीच का भेद पता है।

गिरिधारी यादव और पुतुल कुमारी एक ही नेता के नाम पर वोट मांग रहे हैं, इससे जयप्रकाश यादव के लिए कुछ बोलने का मौका मिल गया है। उनके समर्थक कहते हैं- यहां नीतीश कुमार जदयू के नेता नहीं हैं। यहां तो मोदी ही हैं, जिनके नाम पर दोनों लड़ रहे हैं। ऐसे में यह साबित हो जाता है कि लालू यादव से ही मोदी का मुकाबला है। नीतीश कुमार तो कही हैं ही नहीं। इस बात पर पुतुल कुमारी चुप हो जाती हैं। उनको पता है कि नीतीश कुमार के खिलाफ बोलना उऩ पर भारी पड़ सकता है। हां, वे पुराने दिनों की याद जरूर कर लेती हैं और लंबी सांस छोड़ कर जैसे दिग्विजय सिंह और नीतीश कुमार से समय की बातों से आगे बढ़ना चाह रही हों।

जदयू प्रत्याशी गिरिधारी यादव प्रधानमंत्री की सफल विदेश और रक्षा नीति और उनके गरीबी मिटने के कार्यों के आधार पर जनता से एक बार फिर से अपने लिए समर्थन मांग रहे हैं। बेरोजगारी पर उनका कहना कई अर्थ देता है। वे कहते हैं- जब तक आबादी नियंत्रण नहीं होगा, तबतक यहां बेरोजगारी की समस्या रहेगी, इस पर कोई कुछ भी नहीं कर सकता है। असली और नकली के बीच पर वे कहत हैं कि यहां एनडीए ने मुझे टिकिट दिया है तो कोई तीसरा कैसे उऩका आदमी हो जाएगा। इस मामले में उनका कहना है- जब तेजस्वी भाषण में पुतुल कुमारी को ही एनडीए का असली उम्मीदवार मानते हैं और खुद भी पुतुल जी कहती हैं कि मेरी लड़ाई राजद से है तो यह साफ हो जाता है कि दोनों के बीच कोई खिचड़ी पक रही है।

पर, यह तो है कहने की बात। लोगों में किसी भी बात को लेकर कोई भ्रम नहीं है। टिकिट वितरण और सीट बंटवारे की बीच की यह समस्या है, जिसका खमियाजा पुतुल कुमारी को भुगतना पड़ा है। ऐसे में मुकबल में ज्यादातर लोग पुतुल कुमारी और जयप्रकाश को ही मानते हैं।

इस मामले में जयप्रकाश यादव का मानना है कि पहले गिरिधारी यादव और पुतुल कुमारी जी ही तय कर लें। इस बार पहले से बहुत ज्यादा मार्जिन से चुनाव जीतूंगा। पर, वे निजी बात में यह भी मानते हैं कि पुतुल कुमारी ही असली एनडीए उम्मीदवार हैं। जिनको एनडीए का सिंबल नहीं मिला है, वह असली हैं। असली तो नकली हैं।

इलाके में घूमने पर और लोगों से बातचीत में यह आभास मिल रहा है कि पुतुल कुमारी के चुनाव मैदान में आने से एनडीए मतों में बिखराव हो रहा है। शहरी मतदाताओं का बड़ा हिस्सा पुतुल कुमारी के साथ जा सकता है। पर, यदि यह विभाजन रेखा गहरी होती है तो जयप्रकाश यादव रेस में आगे रह सकते हैं। लोगों में पुतुल कुमारी को लेकर कोई भ्रम नहीं है। लोग मोदी के साथ सीधे-सीधे पुतुल कुमारी को कनेक्ट कर रहे हैं। पर, भाजपा के कुछ कोर वोटरों में इस बात को लेकर थोड़ी नाराजगी भी है कि पुतुल कुमारी को पार्टी नहीं छोड़नी चाहिए थी। और भी मौके आते। ऐसे में वोटिंग के ठीक पहले यह तय होगा कि क्या किया जाए।

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